भारत-यूरोपीय यूनियन व्यापार समझौते पर निर्णायक प्रगति, गणतंत्र दिवस पर ईयू के शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर अब निर्णायक प्रगति के संकेत मिल रहे हैं। दोनों पक्ष इस समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। इसी कड़ी में जनवरी के अंत में यूरोपीय यूनियन के कई शीर्ष नेता भारत का दौरा करेंगे और 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इससे भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी के बीच भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत-यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन की दोनों नेता संयुक्त रूप से अध्यक्षता करेंगे। शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय सहयोग और प्रस्तावित व्यापार समझौते पर अहम चर्चा होने की संभावना है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संकेत दिया है कि भारत इस महीने के अंत तक यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब है। उन्होंने बताया कि ट्रेड डील पर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और आने वाले दिनों में अंतिम सहमति बन सकती है। इससे पहले जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिच मैर्त्स भी संकेत दे चुके हैं कि जनवरी के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर संभव हैं।
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के आयुक्त के साथ दो दिवसीय बैठक कर वार्ता की प्रगति की समीक्षा की थी। वहीं वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी छह-सात जनवरी को ब्रसेल्स में यूरोपीय आयोग की व्यापार महानिदेशक सबाइन वेयंड से मुलाकात की थी। भारत कपड़ा और चमड़ा जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों के लिए शून्य शुल्क की मांग कर रहा है, जबकि यूरोपीय यूनियन मोटर वाहन, चिकित्सकीय उपकरण, शराब, स्पिरिट, मांस और मुर्गी पालन क्षेत्रों में शुल्क कटौती के साथ मजबूत बौद्धिक संपदा व्यवस्था की मांग कर रहा है।
गौरतलब है कि भारत-ईयू व्यापार समझौते पर बातचीत वर्षों तक ठप रहने के बाद वर्ष 2022 में दोबारा शुरू हुई थी। इसके पीछे वैश्विक व्यापार परिस्थितियों में बदलाव और अमेरिका द्वारा उच्च टैरिफ लगाए जाने जैसे कारणों को भी अहम माना जा रहा है, जिससे भारत ने विविध व्यापार साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए।













































































