केंद्रीय बजट 2026 से बाजारों को बड़ी उम्मीद, विनिर्माण व इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा फोकस

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नई दिल्ली। अगले महीने पेश होने जा रहे केंद्रीय बजट 2026 को लेकर बाजार, निवेशकों और उद्योग जगत की निगाहें टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ठहराव, विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच यह बजट घरेलू बाजार को मजबूती देने, निवेश बढ़ाने और विनिर्माण क्षेत्र को गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार इस बजट में विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष फोकस किया जा सकता है, क्योंकि सरकार भारत पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद हालात चुनौतीपूर्ण बने हैं। इसके अलावा भारत पर भारी शुल्क लगाने से जुड़े कानून की चर्चा भी चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में बजट में विनिर्माण और अवसंरचना जैसे विकास क्षेत्रों पर जोर देने के साथ विनिवेश के लक्ष्यों में बढ़ोतरी सहित कई उपाय किए जा सकते हैं।

क्रिसिल इंटेलिजेंस के वरिष्ठ अध्यक्ष और ग्लोबल हेड कंसल्टिंग जगनारायण पद्मनाभन का कहना है कि बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित ग्रोथ को बनाए रखना जरूरी होगा। इसके तहत करीब 12 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय की संभावना है। सड़कों, रेलवे और लॉजिस्टिक्स पर निरंतर निवेश के साथ भारतमाला परियोजना फेज-2.0 जैसे बड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता देना आवश्यक है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़े, रोजगार सृजन हो और राष्ट्रीय कॉरिडोर का विस्तार संभव हो सके।

वहीं कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान का कहना है कि यह बजट विकास में तेजी और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने वाला हो सकता है। उनके अनुसार पूंजीगत व्यय में 8 से 8.5 प्रतिशत तक वृद्धि की उम्मीद है, जो अगले वित्तीय वर्ष में 12 से 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। इससे बुनियादी ढांचे के विकास, नए रोजगार और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही पीएलआई योजनाओं, बहुवर्षीय वित्तपोषण की स्पष्टता तथा एआई, सेमीकंडक्टर और नई तकनीकों के लिए प्रोत्साहन भी बजट के प्रमुख फोकस क्षेत्र हो सकते हैं।

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