सीवेज से दूषित पेयजल आपूर्ति पर एनजीटी सख्त, केंद्र व तीन राज्यों से तलब किया जवाब
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के कई शहरों में लोगों को सीवेज से दूषित पेयजल आपूर्ति किए जाने से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) सहित संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। हरित न्यायाधिकरण ने मंगलवार को दो समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों को गंभीर मानते हुए यह आदेश दिया।
एनजीटी की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल थे, ने कहा कि पहली रिपोर्ट गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और बारां जैसे शहरों में जर्जर और दशकों पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था के चलते सीवेज का पानी पेयजल लाइनों में मिल रहा है।
पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि रिपोर्ट में राजस्थान के शहरों में इंदौर जैसी त्रासदी की आशंका जताई गई है। हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से फैले डायरिया के कारण सात लोगों की मौत हो चुकी है।
एनजीटी ने दूसरी रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-1 में कई लोग सीवेज से दूषित पानी पीने के बाद उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से ग्रसित हो गए। इसी रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कुछ इलाकों में पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है, जिसका कारण ट्यूबवेल में सीवेज का रिसाव बताया गया।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि उठाए गए मुद्दे गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़े हैं और प्रथम दृष्टया यह पर्यावरण संरक्षण अधिनियम तथा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के उल्लंघन को दर्शाते हैं।
एनजीटी ने इस मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकारों, संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालयों से विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।













































































