हरियाणा कांग्रेस के लिए 2025 संगठन निर्माण, नेतृत्व बदलाव और गुटबाजी से जूझने का साल
चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के लिए साल 2025 सियासी हलचलों, संगठनात्मक बदलावों और अंदरूनी संघर्षों से भरा रहा। पार्टी के वरिष्ठ नेता करीब 11 साल बाद प्रदेश में संगठन विस्तार और अनुशासनात्मक कमेटी के गठन को बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत के लिए पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी खुद चंडीगढ़ पहुंचे थे। उनके निर्देशों पर दिल्ली की टीम ने संगठन विस्तार को अंतिम रूप दिया। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह कदम 2026 की राजनीति के लिए मजबूत नींव साबित होगा।
इसी साल हरियाणा कांग्रेस को नया प्रदेशाध्यक्ष भी मिला। राव नरेंद्र सिंह को संगठन की कमान सौंपी गई, लेकिन इस फैसले के सार्वजनिक होते ही पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कैप्टन अजय यादव की नाराजगी सामने आ गई। उनके बेटे चिरंजीव भी प्रदेशाध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे। इसके बावजूद पार्टी ने संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की।
विधानसभा चुनाव 2024 में हार के करीब एक साल बाद कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष भी मिला। इस एक साल के दौरान हरियाणा विधानसभा के तीन सत्र हुए। नेता प्रतिपक्ष के चयन न होने के कारण इन सत्रों में कांग्रेस विधायकों को सत्ता पक्ष के तंज भी झेलने पड़े। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल ने शीतकालीन सत्र में पहली बार संगठित रूप से सदन में अपनी भूमिका निभाई, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ।
साल 2025 में कांग्रेस ने वोट चोरी के मुद्दे को लेकर आक्रामक अभियान भी चलाया। जिलावार कार्यक्रम, हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क के जरिए पार्टी ने माहौल बनाने की कोशिश की। इस अभियान में सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। हालांकि, पूरे साल पार्टी को गुटबाजी और अनुशासनहीनता की समस्या से भी जूझना पड़ा।
कभी पोस्टरों से भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तस्वीर गायब मिली तो कभी सांसद कुमारी सैलजा की। इन विवादों के बाद प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र को पोस्टर प्रोटोकॉल जारी करना पड़ा, जिसमें नेताओं की तस्वीरों के क्रम तक को तय किया गया। राहुल गांधी ने चंडीगढ़ में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में साफ चेतावनी दी कि गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, बावजूद इसके अंदरूनी खींचतान पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
कुल मिलाकर 2025 हरियाणा कांग्रेस के लिए संगठन खड़ा करने, नेतृत्व तय करने और भविष्य की दिशा तलाशने का साल रहा। संगठन विस्तार, प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को पार्टी बड़ी उपलब्धि मान रही है, लेकिन 2026 की राजनीतिक चुनौतियों से पहले गुटबाजी पर काबू पाना कांग्रेस के लिए अब भी सबसे बड़ी परीक्षा बना हुआ है।
इसी बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से प्रेरित होकर हिसार के पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने प्रदेशव्यापी सद्भाव यात्रा शुरू की। 90 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 2600 से 2800 किलोमीटर की इस यात्रा के जरिए वे भाजपा पर भाईचारा तोड़ने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस की विचारधारा जन-जन तक पहुंचाने निकले हैं। हालांकि, पहले ही दिन इस यात्रा को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, प्रभारी और वरिष्ठ नेताओं ने निजी यात्रा बताकर विवाद खड़ा कर दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बिरेंदर सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह पहले आईएएस अधिकारी भी रह चुके हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि हाईकमान के निर्देशानुसार संगठन विस्तार, अनुशासनात्मक कमेटी गठन और वोट चोरी के खिलाफ महाभियान जैसे कदम मजबूती से उठाए गए हैं। भाजपा सरकार के जनविरोधी फैसलों का कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन तक विरोध किया है और आगे भी संगठन को मजबूत करते हुए जनता के हित में काम किया जाएगा।
प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि 2025 में हाईकमान के मार्गदर्शन में पार्टी में कई सकारात्मक फैसले लिए गए। हरियाणा के लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। वर्ष 2026 में कांग्रेस जनता की आवाज बनकर उभरेगी और सरकार को बेनकाब करने के साथ लोगों के हित में ठोस कदम उठाए जाएंगे।













































































