महाराष्ट्र के अगले डीजीपी होंगे एनआईए चीफ सदानंद दाते? राज्य में वापसी के बाद तेज हुईं अटकलें

Screenshot 2025-12-23 202323
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के प्रमुख और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सदानंद वसंत दाते को महाराष्ट्र वापस भेज दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि वह अगले महीने रश्मि शुक्ला के सेवानिवृत्त होने के बाद महाराष्ट्र के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पद संभाल सकते हैं।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow

देर रात कैबिनेट से आदेश हुआ जारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने सोमवार देर रात एक आधिकारिक आदेश जारी कर सदानंद दाते को तत्काल प्रभाव से महाराष्ट्र कैडर में भेजने के गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी दाते को मार्च 2024 में एनआईए का प्रमुख नियुक्त किया गया था, लेकिन राज्य में नेतृत्व की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें समय से पहले वापस बुलाया गया है।

26/11 हमले के रहे हैं हीरो
26/11 के हीरो के रूप में जाने जाने वाले दाते महाराष्ट्र पुलिस के महानिदेशक बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं क्योंकि शुक्ला का कार्यकाल अगले साल तीन जनवरी को खत्म हो रहा है। बता दें कि दाते को 26/11 मुंबई आतंकी हमले में उनकी भूमिका के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। उस समय वे मध्य क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त थे।

26 नवंबर, 2008 की उस रात को दाते को छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के पास और बाद में कामा अस्पताल में आतंकवादियों द्वारा अंधाधुंध फायरिंग के बारे में एक कॉल आया। कुछ ही देर पहले, 10 आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचे थे और पूरे शहर में फैल गए थे। इस दौरान दाते और उनकी टीम ने कामा अस्पताल की छत पर लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों – अजमल कसाब और अबू इस्माइल को घेर लिया था, इस दौरान आतंकवादियों ने कई ग्रेनेड फेंके और अंधाधुंध फायरिंग की।

हमले के दौरान हुए थे घायल
आतंकियों के फेंके गए ग्रेनेड के हमले में दाते गंभीर रूप से घायल हुए थे। आज भी उनके शरीर में ग्रेनेड के धातु के टुकड़े फंसे हुए हैं, जिसमें एक उनकी आंख के पास भी है और वह इन स्थायी निशानों को चोटों के रूप में नहीं, बल्कि युद्ध क्षेत्र से लाए गए पदक के रूप में देखते हैं। 

WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights