कृषि गोष्ठियों से किसानों को होती है नवीन तकनीक की जानकारियाँ

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बदायूँ। कृषि विभाग द्वारा विकासखण्ड परिसर दातागंज में नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन(आॅयल सिड्स) योजनान्तर्गत वर्ष 2020-21 अन्तर्गत जनपद स्तरीय तिलहन मेला का दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह एवं जिलाधिकारी कुमार प्रशान्त ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित एवं माल्यार्पण कर  शुभारंभ किया। यहां उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शियों का भी अवलोन किया।
दातागंज विधायक ने कहा कि इस प्रकार की गोष्ठियों का आयोजन इस लिए होता है, जिससे किसानों को नवीन तकनीक एवं जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। कृषि के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग होते रहते हैं, उन प्रयोगों को किसानों में साझा करने एवं उससे किसानों को लाभ पहुंचाने का उद्देश्य यह कृषि गोष्ठियां आयोजित होती रहती हैं। सरकार चाहती है कि यह अपडेट जानकारियां किसानों को मिलती रहें और इनका किसान लाभ उठाएं। विभिन्न प्रकार के नए बीज, खाद, दवा हैं, इससे उत्पाद बढ़ सकती हैं। किसानों को यह सारी नवीन जानकारियां कृषि वैज्ञानिकों के माध्यम से दिलाने का उद्देश्य है कि देश का अन्नदाता खुशहाल हो, जिससे देश निश्चित ही खुशहाल होगा। प्रधानमंत्री मोदी जी एवं मुख्यमंत्री योगी जी दोनों का संकल्प भी है कि हमारे देश का अन्नदाता खुशहाल होगा, तभी देश खुशहाल होगा। किसानों को खुशहाल बनाने के लिए किसान बिल लाया गया है, लेकिन कुछ लोग इस बिल के बारे में किसानों को भ्रमित करना चाहते हैं, ऐसे लोगों को धीरे-धीरे चेहरे से नकाब हट गया है। किसान भी समझ गए हैं कि जो किसान बिल आया है वह किसानों के हित का ही बिल है। किसान भी समझते हैं कि कौन व्यक्ति किसानों के हित में कार्य करेगा। जो मोदी जी ने किसानों को सम्मान देने की बात या उनको सुविधाएं देने की बात की है कोई 70 साल में भी नहीं कर पाया है। हम जो कहते हैं वह करके दिखाते हैं। किसान गोष्ठी के माध्यम से नवीन प्रकार की जानकारी प्राप्त कर विभिन्न प्रकार की कृषि को बढ़ाने का कार्य करेंगे। सम्बंधित विभाग भी किसानों को उनके उत्थान के लिए आगे आ रहे हैं। महिलाओं के उत्थान के लिए भी जिला प्रशासन इनके द्वारा बनाए उत्पादों को आगे ले जाने के लिए सहयोग कर रहा है। गांव जब खुशहाल होगा, तभी देश तरक्की करेगा।
डीएम ने कहा कि जनपद के किसान अब तेजी से आगे बढ़ रहें हैं। यह पुरानी सोच बनी हुई है कि कृषि केवल खेती होती है और कृषि का मतलब गेहूं और चावल उगाना है, लेकिन कृषि अपने आप में एक विस्तृत शब्द है, इसमें बागवानी, पशु पालन, मत्स्य पालन, रेशम पालन, कीट पालन, मधुमक्खी पालन, खाद संस्करण आदि इसमें शामिल है। किसानों से अपील और अनुरोध है कि कृषि को केवल खेती के नजरिए से न देखें। आप इसका विस्तार किस प्रकार से कर सकते हैं, इसके बारे में भी जरूर सोचें। क्योंकि आप दो फसली या ज्यादा से ज्यादा तीन फसलों की खेती साल में करते हैं, उसके बाद भी पर्याप्त समय रहता है कि खेती से सम्बंधित अन्य व्यवसाय में उस समय का उपयोग कर सकते हैं। अपने जनपद बदायूँ में भी ऐसे कई किसान हैं जो खेती के साथ मशरूम, मसालों, आदि सहित अन्य प्रकार के कृषि कार्य कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। किसान पैकेजिंग के माध्यम से बाजार में अपने प्रोडक्ट्स उतार सकते हैं, किसानों की सेवा करने के लिए राजस्व विभाग बना हुआ है, जो किसानों को आगे बढ़ने में मदद करेगा। पुरानी सोच को बदलना होगा और इसके उत्थान के लिए कई सरकारी योजना भी चल रही हैं, जो जानकारी के अभाव में किसानों तक नहीं पहुंच पाती हैं। इनकी जानकारी के लिए उपनिदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, मत्स्य पालन आदि के कार्यालय में सम्पर्क कर योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है। कृषकों के उत्थान के लिए समस्त सम्बंधित विभाग पूर्ण रूप से सहायता करेंगे। कोई डेयरी का काम शुरू करना चाहता है या मुर्गी फार्म खोलना चाहता है, तो इसकी विस्तृत जानकारी व सहयोग इनसे सम्बंधित कार्यालय में मिल रहा है। जिला प्रशासन आपको सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ दिलाएगा। आइए और आकर योजनाओं का लाभ उठाएं। इसके लिए आपको आगे आने की आवश्यकता है।
मुख्य पशु चिकत्साधिकारी ने पशुपालन के सम्बन्ध में जानकारी दी कि खुरपका, मुहॅपका, का टीकाकरण का कार्य चल रहा है, जनपद मंे पशुओ को आॅनलाइन करने का भी कार्य चल रहा है, किसान डाक्टर्स की टीम को आधार कार्ड अवश्य दंे जिससे किसानों के पशु को आॅनलाइन हो सके, डाक्टरों की टीम कृषक बन्धुओं को 12 अंक का नम्बर उपलब्ध करायंेगी जो नम्बर पशु के कान में टोकन के रूप में लगा होगा, जो कृत्रिम गर्वधान के समय काम आयेगा।
उप कृषि निदेशक डा0 रामवीर कटारा ने जनपद के किसानांे को रेशम से लेकर मशरूम की जानकारी दी कि जनपद में इस वर्ष 50 हे0 भूमि में काले गेहू की खेती की गयी है अगले वर्ष 100 हे0 भूमि में काले गेहूं की खेती करायी जायेगी। किसानों की आय दो गुनी करेगें, जिससे हमारे किसान खुशहाल रहे। यहां किसानों को तिलहनी फसलों की नवीनतम एवं तकनीकी जानकारी दी गई, जिसमें कृषि यन्त्र हेतु स्माल आॅयल एक्सट्रेंशन यूनिट पर अधिकतम 60 हजार रू0 का मात्र अनुदान कृषि विभाग द्वारा देय है, साथ ही कृषि यन्त्रो के अनुदान बारे बताया एवं किसान बन्धुओं को समय से तिलहन फसलों की बुवााई एव खाद लगाने की तकनीकी पद्वति के लिए विस्तार से समझाया। इस अवसर पर सम्बधित अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर उप निदेशक कृषि रामवीर कटारा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ0 अरुण कुमार जादौन, खण्ड विकास अधिकारी महिपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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