58 वें उर्स-ए-शाह शराफ़त का समापन, शहर में उमड़ा जायरीनों का सैलाब
बरेली। 11 रबीउल अव्वल शरीफ़ बरोज़ जुमेरात मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत शाह शराफ़त मियाँ के 58 वें उर्स का आज शानदार समापन हुआ। इस मौके पर शहर में ज़ायरीन की भारी भीड़ देखी गई, जिससे यातायात कई घंटे प्रभावित रहा।
उर्स के आख़िरी दिन की शुरुआत सुबह 8 बजे मेहमान ख़ाने में तकरीरी प्रोग्राम से हुई। इसमें बरेली और आसपास के इलाकों से आए उलमा-ए-किराम ने हिस्सा लिया। अल्लामा शाहिद शैख़, प्रोफेसर महमूद उल हसन, मौलाना रिफ़ाक़त नईमी, मौलाना मुफ्ती फहीम सकलैनी, मौलाना खालिद सकलैनी, मौलाना अबसार सक़लैनी, मौलाना नूर मोहम्मद जैसे उल्मा ने क़ौम को आपस में इत्तिहाद, मोहब्बत, भाई-चारे के साथ रहने की हिदायत की साथ ही तालीम पर बहुत ज़ोर दिया उन्होंने कहा अपने बच्चो को दुन्यवी तालीम के साथ-साथ दीनीटी तालीम भी दिलाएं साथ ही साहिबे उर्स हज़रत शाह शराफ़त मियाँ की पाकीज़ा जिंदगी और उनकी शिक्षाओं पर रोशनी डाली। मौलाना मुफ़्ती फ़हीम अज़हरी ने अपने बयान में ख़ास पैग़ाम देते हुए कहा कि आज हमारी क़ौम ग़ैर ज़रूरी व ग़ैर शरई कामों में उलझी हुई है जैसे शादियों में फ़ुज़ूल रस्में, फ़ुज़ूल ख़र्च किए जाते हैं इन सभी शरीयत के ख़िलाफ़ कामों और नाजाइज़ रस्मों को हमने ख़त्म करना चाहिए, हमें अपने सारे काम इस्लामी व शरीयत की तालीमात के मुताबिक़ करना चाहिए , ख़ानक़ाह के सज्जादा नशीन हज़रत ग़ाज़ी मियाँ हुज़ूर ने उर्स में शामिल सभी ज़ायरीन के लिए और ख़ास तौर से हमारे शहर व मुल्क के अमन चैन व खुशहाली के लिए ख़ुसूसी दुआएँ कीं और साथ ही ये पैग़ाम दिया कि आपस में मोहब्बत इत्तिहाद भाईचारा क़ायम करें और मिलजुल कर रहने की हिदायत की साथ ही आपने दूसरे उर्स ए सकलैनी का ऐलान किया और बताया उर्स 24 सितंबर से 28 सितंबर तक मनाया जाएगा, उर्स में मुरीदीन को आने की दावत दी।
ठीक 11 बजे अपने मुकरर्र वक्त पर कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई, कुल शरीफ़ की रस्म अदा की। मंच से ऐलान किया गया कि उर्स ए सकलैनी के मौके पर हज़रत शाह सकलैन एकेडमी की जानिब से एक 14 सितम्बर को बिशप मंडल इंटर कॉलेज मैदान में “इज्तिमाई निकाह” सामूहिक विवाह का प्रोग्राम किया जायेगा। उर्स ख़त्म होने पर पूरे देश से आए ज़ायरीन की भीड़ ने शहर की सड़कों पर जाम लगा दिया। नए शहर से लेकर पुराने शहर तक कई घंटे तक ट्रैफिक रुका रहा। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह चौकस रहा और हालात पर काबू पाने में कामयाब रहा। इस मौके पर बाज़ारों में भी भारी भीड़ देखी गई। स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ दूर-दराज से आए व्यापारियों को भी अच्छा फायदा हुआ। यह सालाना उर्स का जश्न एक बार फिर बरेली की सूफी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभरा। उर्स-ए-शाह शराफ़त ने न सिर्फ मज़हबी तौर पर, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप और एकता के लिहाज़ से भी अपनी अहमियत साबित की। इस साल उर्स में पुलिस प्रशासन व नगर निगम, विधुत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग का विशेष सहयोग प्रदान किया गया, स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेडिकल कैम्प, एम्बुलेंस सेवा, एवम फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ आदि का विशेष सहयोग रहा। कुल शरीफ़ के मौक़े पर स्टेज पर खुसूसी तौर पर हज़रत मुंतखब मियां, हज़रत सादकैन सकलैनी, हाफ़िज़ गुलाम गौस, हमज़ा सकलैनी, मुर्तुजा सकलैनी, मुंतसिब सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, सलमान सकलैनी, मुनीफ सकलैनी, फैजयाब सकलैनी, असदक सकलैनी, शाहिद शेख़, हाजी लतीफ़ आदि मौजूद रहे।













































































