बदायूं जिला कारागार में भाई-बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया गया

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बदायूं। रक्षाबंधन का पावन पर्व प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है। इस पर्व का महत्व केवल घर-आंगन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों के स्नेह और भावनाओं को हर परिस्थिति में जोड़ने का संदेश देता है। इसी भाव को जीवंत करते हुए बदायूं के जिला कारागार में शनिवार को रक्षाबंधन का त्योहार विशेष उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया गया। सुबह से ही कारागार परिसर में एक अलग ही रौनक दिखाई दे रही थी। जिले के विभिन्न इलाकों से आई बहनें अपने कैदी भाइयों से मिलने और उन्हें राखी बांधने के लिए जेल गेट पर कतारबद्ध होकर खड़ी थीं। जिला कारागार प्रशासन की ओर से इस अवसर पर बहनों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि सभी बहनें बिना किसी असुविधा के अपने भाइयों तक पहुंच सकें। विशेष व्यवस्थाओं में दिखी संवेदनशीलता जिला कारागार प्रशासन ने रक्षाबंधन पर्व को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। सभी बहनों को निर्धारित लाइन में लगाकर जेल परिसर में प्रवेश कराया गया। इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ को तैनात किया गया, जो बहनों को गेट से उनके भाइयों तक ले जाने में सहयोग करता रहा। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सभी मुलाकातें अनुशासन और सुरक्षा के दायरे में संपन्न हों। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस फोर्स की भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई थी। जेल परिसर और मुख्य गेट पर पुलिसकर्मी सतर्कता से तैनात थे। वहीं, महिला पुलिसकर्मी बहनों के प्रवेश और तलाशी प्रक्रिया में सहयोग करती नजर आईं। भावनाओं से भरे रहे मिलन के पल जेल के अंदर प्रवेश करते ही बहनों के चेहरों पर अपने भाइयों से मिलने की खुशी और भावनाओं की चमक साफ झलक रही थी। जब बहनों ने अपने कैदी भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई, तो कई की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर भाइयों ने भी अपनी बहनों से वादा किया कि वे उनका सम्मान और रक्षा हमेशा करेंगे।

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कई बहनों ने बताया कि रक्षाबंधन का यह दिन उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि चाहे उनके भाई जेल में हों, लेकिन रिश्तों का यह बंधन किसी दीवार में कैद नहीं हो सकता। एक बहन ने कहा, “राखी का धागा सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि यह हमारे रिश्ते का भरोसा है, जो हर परिस्थिति में अटूट रहता है।”

व्यवस्थाओं की हुई जमकर सराहना
जेल से बाहर निकलते समय बहनों ने जिला कारागार प्रशासन की व्यवस्थाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस बार की व्यवस्था बेहद सुचारू और सुविधाजनक रही। लाइन से प्रवेश, बैठने की उचित व्यवस्था, समय पर मुलाकात और सुरक्षा का पूरा ध्यान – इन सबने इस रक्षाबंधन को खास बना दिया।

जिला कारागार अधीक्षक ने बताया कि प्रशासन का प्रयास था कि भाई-बहन का यह पावन मिलन सुरक्षित और गरिमापूर्ण तरीके से संपन्न हो। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्वों से कैदियों के मनोबल में सकारात्मक ऊर्जा आती है और पारिवारिक जुड़ाव मजबूत होता है।

पर्व के साथ संवेदनाओं का संगम
रक्षाबंधन का यह आयोजन न केवल भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि जेल की ऊंची-ऊंची दीवारें भी रिश्तों की भावनाओं को नहीं रोक सकतीं। राखी के धागे ने कैदियों के लिए एक क्षणिक ही सही, लेकिन भावनाओं और अपनेपन का माहौल तैयार किया।

जिला कारागार में मनाया गया यह रक्षाबंधन एक मिसाल बन गया कि त्योहार केवल आज़ादी में ही नहीं, बल्कि बंधनों के बीच भी पूरी गरिमा और प्रेम के साथ मनाए जा सकते हैं। इस अवसर पर भाई-बहन का स्नेह, प्रशासन की संवेदनशीलता और सुरक्षा व्यवस्था – सभी ने मिलकर एक यादगार पर्व की रचना की।

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