बदायूं में रक्षाबंधन पर दिनभर जाम का कहर, कुछ मिनट का सफर घण्टों में तय किया

बदायूं। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जहां भाई-बहन एक-दूसरे से मिलने के लिए बेसब्री से तैयार थे, वहीं बदायूं की सड़कों पर जाम का ऐसा आलम रहा कि लोगों को घंटों तक वाहन में बैठकर इंतजार करना पड़ा। सुबह से शुरू हुआ जाम का सिलसिला देर रात तक थमने का नाम नहीं ले रहा था। शहर की सीमा खेड़ा नवादा पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लगी रहीं। बरेली, मुरादाबाद, आगरा और मथुरा की ओर जाने वाले वाहन रेंगते हुए आगे बढ़े।
प्रमुख मार्गों पर वाहन रेंगते रहे
लालपुल, कचहरी, जेल रोड, इंद्रचौक और दातागंज तिराहा—ये सभी स्थान दिनभर जाम की चपेट में रहे। इन इलाकों में अक्सर जाम की स्थिति बनती है, लेकिन त्योहार के दिन हालात और बिगड़ गए। दो-दो घंटे तक वाहन एक ही जगह फंसे रहे, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई। कई लोग तो अपने वाहन छोड़कर पैदल ही मंजिल की ओर बढ़े, ताकि समय पर अपने घर पहुंच सकें।
पुलिस और ट्रैफिक व्यवस्था रही ध्वस्त
बदायूं की ट्रैफिक व्यवस्था इस बार पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। पुलिसकर्मी जगह-जगह तैनात तो थे, लेकिन वाहनों के भारी दबाव के सामने उनकी व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। खेड़ा नवादा और लालपुल पर पुलिस चौकी होने के बावजूद जाम खुलवाना मुश्किल हो गया। पुलिसकर्मी समय-समय पर वाहनों को निकालने का प्रयास करते दिखे, लेकिन वाहनों का अंबार इतना था कि उनके प्रयास नाकाम रहे।
त्योहार पर ट्रैफिक लोड का अंदाजा नहीं था
आज के दिन बदायूं की सड़कों पर सामान्य दिनों से कई गुना अधिक ट्रैफिक लोड रहा। शहर के अंदर और बाहर से आने वाले रिश्तेदारों, त्योहार की खरीदारी और रोडवेज व प्राइवेट बसों की भीड़ ने मिलकर सड़कों की क्षमता से कई गुना अधिक भार डाल दिया। ऐसा प्रतीत हुआ कि जिला प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को इस भीड़ का पूर्वानुमान ही नहीं था। नतीजा यह हुआ कि जाम से निपटने की कोई ठोस योजना पहले से तैयार नहीं की गई थी।
यात्रियों की परेशानियां और नाराजगी
जाम में फंसे यात्रियों में काफी नाराजगी देखने को मिली। कई परिवार रक्षाबंधन के अवसर पर तय समय पर अपने गंतव्य पर नहीं पहुंच सके। भाई-बहन जो पूरे साल इस दिन का इंतजार करते हैं, उन्हें पहले घंटों जाम में जूझना पड़ा, उसके बाद ही वे मिलन कर पाए। कई लोग तो जाम से तंग आकर लौट भी गए। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को इस भीषण जाम में सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
रोडवेज और निजी बसें भी बनीं समस्या
त्योहार पर महिलाओं के लिए योगी सरकार द्वारा दी गई मुफ्त यात्रा सुविधा का असर बदायूं रोडवेज बस स्टैंड और प्राइवेट बस अड्डों पर साफ नजर आया। बस स्टैंड से लेकर शहर की मुख्य सड़कों तक बसों की लंबी कतारें लग गईं। यात्रियों की संख्या इतनी अधिक थी कि बसों में चढ़ने के लिए मारामारी की स्थिति बन गई। इन बसों के रुकने और आगे बढ़ने में समय लगने से भी यातायात पर दबाव बढ़ा।
स्थानीय व्यापारियों पर असर
जाम की वजह से बाजारों में भीड़ अपेक्षा से कम रही। कई ग्राहक ट्रैफिक में फंसने के डर से बाजार तक नहीं पहुंच पाए। जिन दुकानदारों ने रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष छूट या ऑफर रखे थे, उनकी बिक्री पर भी असर पड़ा। व्यापारियों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले से योजना बनाता, तो भीड़ को संभालना आसान होता और व्यापार को भी नुकसान नहीं होता।
प्रशासन के लिए सबक
रक्षाबंधन जैसे बड़े पर्व पर जाम की स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक है। यदि समय रहते वैकल्पिक मार्ग, अतिरिक्त पुलिस बल और पार्किंग की व्यवस्था की जाती, तो यातायात पर नियंत्रण रखा जा सकता था। त्योहारों के मौसम में अचानक ट्रैफिक लोड बढ़ना स्वाभाविक है, इसलिए भविष्य में इसके लिए ठोस रणनीति बनाना जरूरी है।
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है, लेकिन इस बार बदायूं में यह दिन ट्रैफिक जाम की भेंट चढ़ गया। कई परिवार समय पर मिलन नहीं कर पाए और जिनको मौका मिला, उन्हें भी पहले घंटों सड़क पर ही बिताने पड़े। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में प्रशासन इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी करेगा, ताकि त्योहार का आनंद यातायात की मारामारी में न खो जाए।