संगर्ष से समृद्धि तक: बरेली के “सुखसागर” ब्रांड की प्रेरणादायक गाथा

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बरेली। 1947 के विभाजन के बाद जब देश पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहा था, तब कई परिवार अपने अस्तित्व की नई तलाश में थे। उन्हीं में से एक थे लाल गुरदास मल आनंद, जो अपने परिवार के साथ विभाजन की पीड़ा सहते हुए बरेली आए। छोटे-छोटे कार्यों से जीवन का प्रारंभ किया कंधे पर सिगरेट-बीड़ी बेचना, कपड़े की हॉट लगाना, सड़क पर सामान बेचना यह सब केवल पेट पालने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और परिवार की उम्मीद का माध्यम था। 1950 में उन्होंने ड्राई फ्रूट्स का व्यवसाय शुरू किया। वह हर रात दिल्ली जाकर माल लाते और बरेली में बेचते। यही दिनचर्या थी, यही तपस्या। लेकिन व्यापार का रास्ता आसान नहीं था। कुतुब खाना सब्जी मंडी में भीषण आग लगी और सब कुछ नष्ट हो गया। परंतु उन्होंने हार नहीं मानी। व्यापार को फिर खड़ा किया। लेकिन नियति ने 1974 में फिर वही किया दूसरी बार मंडी में आग लगी और सब कुछ फिर स्वाहा हो गया। फिर भी उन्होंने साहस नहीं खोया, थोड़ी पूंजी से व्यापार को दोबारा खड़ा किया। बरेली को दी काजू बर्फी की सौगात बरेली में जब मिठाइयों का सीमित बाजार था, लाल गुरदास मल आनंद ने शहर को काजू की बर्फी की पहचान दी। उन्होंने लोगों को बताया कि अच्छी काजू बर्फी कैसे बनती है और किस काजू से बनती है। उस समय ड्राई फ्रूट आम नहीं, बल्कि केवल धनाढ्य वर्ग की पहुंच में था। लेकिन आनंद जी ने इसे आमजन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया। संघर्ष से साम्राज्य तक बच्चों ने बड़े होकर व्यापार में साथ दिया। उत्तरांचल से लेकर लखनऊ, आगरा तक व्यापार फैला। संसाधनों की कमी और कठिन रास्तों के बावजूद, सुखसागर ने अपनी गुणवत्ता और ईमानदारी से मिठाई व ड्राई फ्रूट व्यवसाय में एक अलग पहचान बनाई। आज सुखसागर एक ऐसा नाम है, जो न केवल बरेली बल्कि पूरे उत्तर भारत में ड्राई फ्रूट्स और मिठाइयों के लिए जाना जाता है जब नकली चीजों का बाजार फैला, तब भी सुखसागर ने गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया। उन्होंने बरेली में 150 नंबर का काजू, ₹4000 किलो की अंजीर, ₹3000 किलो की किशमिश, ₹5000 किलो का चिलगोजा जैसी दुर्लभ चीजें उपलब्ध कराईं। यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है “अच्छा खाओ, अच्छा जियो।” एकता, सेवा और समाजसेवा की मिसाल संयुक्त परिवार की परंपरा को निभाते हुए आज भी आनंद परिवार एकजुट होकर व्यापार कर रहा है। संजय आनंद ने पंजाबी महासभा के रूप में समाजसेवा की एक नई परंपरा शुरू की। ज़रूरतमंदों तक मदद पहुंचाना, सामाजिक एकजुटता लाना इन कार्यों से उन्होंने मानवता की मिसाल कायम की। आज समय बदल चुका है, सुखसागर ने अपने ब्रांड को भी बदला। अब सैनिक पेट्रोल पंप, सिविल लाइंस के सामने उनका चौथा शानदार आउटलेट खुल चुका है। इस अवसर पर शहर और क्षेत्र के कई गणमान्य जनों ने आकर अपनी शुभकामनाएं दीं, जिनमें शशांक भाटिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ,दुर्विजय सिंह शाक्य क्षेत्रीय अध्यक्ष , महापौर डॉ. उमेश गौतम, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, विधायक संजीव अग्रवाल, पूर्व विधायक पप्पू भरतौल, जीएसटी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह, पूर्व मेयर डॉक्टर आई एस तोमर, गुलशन आनंद, यतिन भाटिया, नेहा साहनी, मनीषा आहूजा, देवराज चंडोक, सतीश सक्सेना, सौरभ खन्ना, मोहम्मद फरहत, सलीम पटवारी, और अनेक सामाजिक व व्यावसायिक हस्तियां शामिल रही।

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