युवा संकल्प सेवा समिति ने योगेंद्र सागर के नेतृत्व में मुरादाबाद बदायूं हाईवे पर किया पौधारोपण

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बदायूं। आज युवा संकल्प सेवा समिति ने विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्था के कोषाध्यक्ष योगेंद्र सागर के नेतृत्व में व संस्था के सदस्यों के साथ मुरादाबाद बदायूं हाईवे निकट पटेल चौक पर पौधारोपण किया गया व एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता संगठन के सचिव पुनीत कुमार कश्यप एडवोकेट ने की व संचालन संस्था सदस्य अरविंद दिवाकर ने किया।संस्था के सदस्य पुनीत कुमार कश्यप ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पर संस्था द्वारा पूरे जिले में 258 पौधे संस्था के सदस्य द्वारा लगाए गए हैं व इन पौधों की संरक्षण की जिम्मेदारी भी संस्था के सदस्यों को सौंपी गई है उन्होंने कहा कि इस कोरोना जैसी भयंकर स्थिति में जो ऑक्सीजन की कमी हुई थी उससे सीख लेते हुए सभी लोगों को कम से कम एक पौधा लगाना चाहिए और उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए जैसे हम अपने बच्चों की केयर करते हैं उसी प्रकार इन पौधों की भी देखभाल करनी चाहिए जिससे कि आने वाले समय में ऐसी स्थिति फिर से उत्पन्न ना हो सके। उन्होंने संस्था के उपस्थित सदस्यों को शपथ भी दिलाई कि वह स्वयं भी पौधे लगाएंगे और अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी पौधे लगाने के लिए जागरूक करेंगे जिससे आने वाले समय में वातावरण शुद्ध व स्वच्छ रहे व हमें ऑक्सीजन पूरी मात्रा में मिलती रहे। संस्था के कोषाध्यक्ष योगेंद्र सागर ने कहा कि पर्यावरण में पिछले कुछ वर्षों से कई तरह के असामान्य और अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। ये परिवर्तन प्रकृति के प्रमुख घटकों जल, जंगल, जमीन और समस्त वायुमंडल को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। यह दुष्प्रभाव इतना तीव्र है कि पृथ्वी, इसके वायुमंडल और संपूर्ण जीव जगत के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही मानव व्यवहार में लगातार नष्ट हो रही जैव विविधता, एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। हाल ही में विश्व आर्थिक मंच डब्ल्यूईएफ ने अपनी ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2021 में जैविक विविधता की हानि को मानव सभ्यता के सामने मौजूद सबसे बड़े खतरों में शुमार किया है।

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प्रदूषण रोकने के कुप्रबंधन और वनों की अनियंत्रित कटाई से भी पर्यावरण का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। इसके दुष्परिणाम ग्लोबल वार्मिंग, चक्रवात, बाढ़ और तूफान के रूप में दिखते हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक और पर्यावरणविद लगातार बिगड़ते पर्यावरण के बारे में पूरी दुनिया को आगाह कर रहे हैं।संस्था सदस्य अरविंद दिवाकर ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण बीते डेढ़ वर्षो में दुनिया पूरी तरह बदल गई है। इन बदली हुई परिस्थितियों ने मनुष्यों को प्रकृति और इसके पर्यावरण के प्रति नए सिरे से सोचने पर विवश किया है। अब तक मनुष्य प्रकृति को तरह-तरह से अपने वश में करने का उपाय कर रहा था, लेकिन एक छोटे से वायरस के आगे पूरा मानव समुदाय असहाय नजर आ रहा है। कहीं वैश्विक महामारी कोरोना भी मानव की किसी भूल का तो परिणाम नहीं? इसके कारण हुए लॉकडाउन के दौरान स्वच्छ हवा और जल क्या यह संदेश नहीं देते कि पर्यावरण को शुद्ध रखा जा सकता है? इस तरह के कई सवालों पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। कोरोना की उत्पत्ति को लेकर लेकर बाद में होने वाले शोधों से चाहे जो निष्कर्ष निकाले, फिलहाल अभी के लिए कोरोना ने पर्यावरण के प्रति इंसान को अपने बर्ताव में बदलाव लाने की चेतावनी तो दे ही दी है।इस मौके पर विशाल वैश्य, नितिन कश्यप, अजय कुमार, सुनील कुमार ,सौरभ कुमार, शंकर लाल, आदि सदस्य उपस्थित रहे।

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