उलमा ने किया फतवा जारी आतंकवाद की इस्लाम मे कोई जगह नही
बरेली। कश्मीर के पहलगाम मे आतंकवादी घटना के बाद भारत पाकिस्तान की जगं और फिर सीजफायर जैसे महात्व पूर्ण मूद्दो पर सुन्नी बरेलवी उलमा आज बड़ी तादाद मे इकट्ठा हुए। इस बैठक मे मौजूदा सूरते हाल के पेशे नज़र उलमा ने आतंकवाद के अहमद इश्यू पर गहन चर्चा करके एक “फतवा” आतंकवाद के खिलाफ जारी किया। बहराइच निवासी डॉ अनवर रज़ा कादरी के पूछे गए सवाल के जवाब मे ये फतवा दिया गया है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने एक प्रेस कांफ्रेंस मे फतवा जारी किया, जिसमे भारी तादाद मे सुन्नी उलमा मौजूद थे। फतवे मे लिखा गया कि, कुरान में कहा गया है कि एक व्यक्ति की हत्या पूरी मानवता की हत्या है। पैगम्बर इस्लाम ने एक हदीस में कहा है कि अच्छा मुसलमान वह है जिसके हाथ, पैर और जुबान से किसी को नुकसान न पहुंचाएं। पैगम्बर इस्लाम ने एक अन्य हदीस में कहा है कि अपने देश से प्रेम करना आधा ईमान है। पैगम्बर इस्लाम ने एक अन्य हदीस में आगे फ़रमाया है कि मुसलमान जहां भी और जिस देश में रहते हैं, उन्हें उस देश की धरती से प्रेम करना चाहिए। अब इस पृष्ठभूमि में, कुरान और हदीस की रोशनी में, इस्लाम स्पष्ट रूप से आतंकवादी घटनाओं की निंदा करता है। फतवे में हाफ़िज़ सईद के संगठन लश्कर ए तैयबा और मसूद अजहर के संगठन जैश ए मोहम्मद आदि संगठनो को गैर इस्लामी बताते हुए कहा कि, जो लोग इस्लाम के नाम पर संगठन बना चुके हैं, जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद आदि और उनके माध्यम से लोगों की हत्या कर रहे हैं, ये सभी चीजें शरीयत की रोशनी में अवैध और नाजायज़ व हराम हैं। इस्लाम शांति और अमन का धर्म है और समाज के हर वर्ग में शांति पसंद करता है। पैगम्बर इस्लाम ने अपने पूरे जीवन में किसी भी अनुयायी, मुस्लिम या गैर-मुस्लिम की हत्या का आदेश नहीं दिया। फतवे में सख्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा गया है कि, इस्लाम सभी लोगों के साथ अच्छा बर्ताव और अच्छा व्यवहार करने का आदेश देता है। इन दिनों, कुछ लोग कुरान और इस्लाम में “जिहाद” के अर्थ को गलत तरीके से पेश करके इस्लाम के नाम पर एक-दूसरे को मारने की कोशिश कर रहे हैं। यह इस्लाम और कुरान और हदीस के सिद्धांतों (नियमों) के पूरी तरह से खिलाफ है। इस्लाम ने हमें एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होने के लिए भी कहा है। पहलगाम हमले पर फतवे में कहा गया है कि, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। बल्कि, यह आतंकवादी हमला क्रूर, अत्याचारी और कायरतापूर्ण है। इसलिए हम आतंकवाद का कड़ा विरोध करते हैं और इसकी निंदा करते हैं। और हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस तरह की तमाम आतंकवादी घटनाएं शरीयत की रोशनी मे न जायज़ और हराम है।
बैठक मे शाहजहांपुर से मौलाना इकबाल फूल मियां व मौलाना तारिक, पीलीभीत से मौलाना गुलाम मोहिउद्दीन हशमती व मौलाना अब्दुर रशीद, बदायूं से कारी हशमत व मौलाना आलम रज़ा, रामपुर से मौलाना मुस्तकीम रज़ा व मौलाना अब्दुर राउफ। बरेली से मौलाना मुजाहिद हुसैन, मुफ्ती अब्दुल वाहिद, मुफ्ती हाशीम रज़ा, मौलाना हामिद नूरानी, मौलाना जफरुद्दीन, मौलाना नदीम, मौलाना अनस रज़ा, मुफ्ती कमर रज़ा, मौलाना खुर्शीद रज़वी, हाजी नाजिम बेग, मौलाना ऐजाज़ रज़वी, मौलाना सेफ रज़ा, हाफ़िज़ शकील आदि भारी तादाद मे मस्जिद के इमाम और मदरसों के प्रबंधको व प्रधानाचार्यो ने भाग लिया।