निजीकरण के विरोध में निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा ने दिया ज्ञापन

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बरेली। निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले घटक संगठन-क्रांतिकारी लोक अधिकारी संगठन, उ. प्र. पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ, विद्युत तकनीकी एकता संघ उत्तर प्रदेश इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने संयुक्त रूप से जिला अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है जिसमे बताया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन एवं इसके सहयोगी निगमों द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारीयों से लाइनमैन, उपकेन्द्र परिचालन व तकनीकी कार्य कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके वेतन अन्य सुविधाओं में भेदभाव तथा शोषण किया जा रहा है सुरक्षा उपकरण न मिलने के कारण यह कर्मचारी आए दिन दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। मानक के अनुरूप संख्या कम होनो के बावजूद कर्मचारियों की छटनी की जा रही है। जबकी यह विभाग की रीढ़ का काम कर रहे हैं व इन्हीं की वजह से बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित है। विभाग का निजीकरण देश की आम जनता एवं मजदूर किसानों के लिए घातक सिद्ध होगा। कर्मचारियों पर फेशियल अटेंडेंस लगाने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही 55 वर्ष आयु का हवाला देकर बकाया वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा। ज्ञापन में मांग की है कि कर्मचारियों को 60 वर्ष उम्र तक कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाए, कर्मचारियों की छटनी पर रोक लगाई जाए, सभी संविदा एवं निविदा कर्मचारियों को सम्मान रूप से वेतन दिया जाए, फेशियल अटेंडेंस लगाने हेतु दबाव न बनाया जाए बिजली की चपेट में आकर या खंबे से नीचे गिरकर घायल कर्मचारियों का कैशलेस इलाज कराया जाए। ज्ञापन देने वालों में फैशल, सोहेल, रामसेवक, हिमांशु, मोहित, प्रशांत, उमेश, पप्पू आदि लोग उपस्थित रहे।

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