हैदराबाद से आई चादर हज़रत वली मियां की मज़ार शरीफ़ पर चादर पेश की

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बरेली। आस्ताना ए आलिया मोहम्मदीया (दरगाह वली मियां) में कुतुबुलअक़ताब किब्ला अल्हाज अश्शाह मौलाना वली मोहम्मद‌ रहमतुल्लाह अलैह (वली मियां) के चार रोज़ा उर्स ए मोहम्मदी के तीसरे रोज़ हस्बे मामूल सुबह बाद नमाज़ फ़जर कुरान ख़्वानी हुई। बाहर से ज़ायरीनों के आने का सिलसिला जारी है मुल्क व बहरूनी मुल्क केे ज़ायरीन तशरीफ़ ला चुके हैं। दिन में जगह जगह से ज़ायरीन चादरों का जुलूस लेकर पहुंचे इसी कड़ी में हैदराबाद से मोहम्मद अकबर,मोहम्मद अली मोहियुद्दीन, इमरान कुरैशी,अशफ़ाक़ हुसैन,ज़ुबैर आदि चादर लेकर पहुंचे और हज़रत वली मियां की मज़ार शरीफ़ पर चादर पेश की। रात बाद नमाज़ इशा(9 pm) प्रोग्राम का आग़ाज़ कलाम ए पाक की तिलावत से किया गया हाफ़िज़ हाशिम,गुलाम सुबहानी,मौलाना अनीस आदि ने नात ख़्वां‌‌ हज़रात नात व मंंक़बत पढ़ी। प्रोग्राम की निज़ामत कर रहे शायरे इस्लाम ख़ालिद नदीम बदायूंनी ने “तारीकियाँ मिटाएंगे अपने नसीब की, इस्मेगिरामी आपका लिख कर कलम से हम” शेर पढ़कर शोरा हज़रात को दावत दी। सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियां हुज़ूर ने “काबे के सहन में तो कभी तैबा के हरम,बैठे हैं ताजदारे हरम के करम से हम” यह शेर पढ़ा और दूसरा शेर “तालीम ए मुस्तफ़ा को बना ले मियारगर,बमुस्तनद रहेंगे ये दारूल उलूम से हम” तो महफ़िल नारों से गूंज उठी । नवाब अख़्तर मोहनपुरी के “हस्ती को पहले इश्के नबी में फ़ना करें, फ़िर कम नहीं लगेंगे किसी मोहतरम से हम” इस शेर पर खूब दाद मिली। शराफ़त शेरी के “कितना भी ज़ोर आज़मा दौरे जहां मगर,ख़ाइफ़ नहीं ज़रा तिरे ज़ुल्मो सितम से हम” शेर पर खूब वाह वाह हुई, डा. अदनान काशिफ़ के “सूरज से बोला चाँद से रोशन हैं हम मगर, बढ़कर नहीं ज़रा भी चराग ए हरम से हम” शेर को खूब सराहा गया । डा. हिलाल बदायूंनी ने “आकर दरे वली पे ही दिल को मिला सुकूँ,घबराए जब भी दुनिया के ज़ुल्मो सितम से हम” पढ़कर अक़ीदत का नज़राना पेश किया, सरवत परवेज़ सहसवानी ने “नाते रसूल लिखते हैं जिस कलम से हम, अल्फाज़ लेके आते हैं शाहे उम्मीद से हम “, डा. अमन बरेलवी ने ये “सोचते हैं हशर में क्या मुंह दिखायगें,इस दरजा शर्म सार हैं शाहे उम्म से हम” शेर पढ़कर और खुशनुमा कर दिया, रईस अहमद रईस के “फिर भी ख़ुदा के फ़ज्ल से क़ायम है हौसला,माना बहुत निढाल हैं जुल्मों सितम से हम” इस कलाम ‌को खूब पसंद किया गया। दुलारे फ़ारूकी, शाद पीलीभीती, डा. नईम शबाब कासगंजवी आदि ने अपने अशआर पढ़े। मुशायारे के इख़्तेताम के बाद हज़रत अनवर मियां हुज़ूर ने खुसूसी दुआ की । इस मौके पर सय्यद नाज़िर अली(चाँद),फ़ैज़ी हक़,ग़ाज़ी अल्लाह,वसी उल्लाह,शाहिद हुसैन,शमसुद्दीन,फ़िरासत,मोहम्मद सुलेमान,रिजवान,रोमान शमसी,खानिम खान आदि मौजूद रहे। “मीडिया प्रभारी सय्यद नाज़िर अली( चाँद) ने बताया कि उर्स ए मोहम्मदी में कल सुबह 27 फ़रवरी कुरान ख़्वानी होगी दिन में चादर पोशी रहेगी, तक़ारीर उल्मा ए अकराम होगी जिसमें मौलाना ततहीर अहमद साहब का भी ख़ुसूसी‌‌‌‌ ब्यान होगा और शाम 4.50 पर सज्जादानशीं अल्हाज अनवर मियाँ हुज़ूर की सदारात में कुल शरीफ़ का इख़्तेताम‌ हो जाएगा “।

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