प्रदेश में समय पर मिल रहे गन्न्ाा मूल्य भुगतान से गन्न्ाा किसान हो रहे हैं समृद्ध

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बदायूँ । गन्न्ाा की खेती भारत वर्ष की महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों में से एक है और इसका नकदी फसल के रूप में प्रमुख स्थान हैं। चीनी का मुख्य स्त्रोत गन्न्ाा हैं। भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। गन्न्ो की खेती में बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार मिलता है और इससे विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती हैं। उŸार प्रदेश में 29.66 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर गन्न्ाा की खेती की जाती है। प्रदेश में 45 जिलों से अधिक लगभग 46.50 लाख किसान गन्न्ाा की खेती करते है। नकदी फसल होने के कारण गन्न्ाा किसान गन्न्ाा उत्पादन में परिश्रम कर उत्पादकता बढ़ाते हुए समृद्ध हो रहे है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में गन्न्ाा किसानों को हर स्तर पर सहायता दी जा रही है। नवीन तकनीक और नवीन उत्पादकता बढ़ाने वाले बीजों का वैज्ञानिक ढंग से प्रयोग करते हुए किसान गन्न्ाा उत्पादन बढ़ा रहे है। गत आठ वर्षों में 46.50 लाख गन्न्ाा किसानों को अब तक रू0 2,80,223 करोड़ गन्ना मूल्य का भुगतान किया गया है। यह वर्ष 1995 से 15 मार्च 2017 (22 वर्ष) में हुए कुल भुगतान से रू0 66 हजार 703 करोड़ अधिक है। समय पर गन्न्ाा मूल्य का भुगतान मिलने से किसानों की आय में बढ़ोŸारी हो रही है। प्रदेश में वर्ष 2016-17 में गन्ना का क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 29.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। गन्न्ाा क्षेत्र बढ़ने से किसानों की आय में औसतन 370 रूपये प्रति कुन्तल की दर से 43,364 रूपये प्रति हेक्टेयर की वृद्धि हुई। उŸार प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को दिये गये प्रशिक्षण और नवीन तकनीक का ही परिणाम हैं कि वर्ष 2016-17 से पहले, जहां गन्ना उत्पादन 72 टन प्रति हेक्टेयर था, वही वर्ष 2024-25 में गन्न्ाा उत्पादन 85 टन प्रति हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश में किसानों को क्षेत्रीय स्तर पर गन्न्ाा चीनी मिलों तक पहुचाने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर स्थापित चीनी मिले में आसानी से पहुचाया जाता है। किसानों को दी गयी पर्ची के हिसाब से चीनी मिलों द्वारा गन्न्ाा प्राप्त किया जाता है। प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें क्रियाशील है। चीनी मिलों की दैनिक पेराई क्षमता जो वर्ष 2017 से पूर्व 7.50 लाख टीसीडी थी, वह बढ़कर अब 8.36 लाख टीसीडी हो गयी है। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर प्रदेश में बन्द चीनी मिलों को भी संचालित किया गया है। मार्च, 2017 से अब तक 03 नई चीनी मिलों की स्थापना की गयी है तथा 06 चीनी मिलों का पुर्नसंचालन एवं 38 चीनी मिलों का क्षमता विस्तार किया गया है। इन चीनी मिलों में लगभग 1.25 लाख लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है। प्रदेश सरकार ने बन्द पिपराईच चीनी मिल में 60 ज्ञस्च्क् क्षमता की आसवानी तथा बंद पड़ी छाता चीनी मिल पर 2000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल एवं लॉजिस्टिक हब वेयर हाउसिंग काम्प्लेक्स की स्थापना की जा रही है। प्रदेश में पेराई सत्र 2018-19 नवीन खाण्डसारी लाइसेसिंग नीति निर्गत की गयी। नई खाण्डसारी इकाई के लाइसंेस हेतु चीनी मिल से त्रिज्यात्मक दूरी 15 कि.मी. से घटाकर 7.5 किमी कर दी गयी। विगत 25 वर्षों में प्रथम बार अद्यावधिक तिथि तक कुल 285 नई खाण्डसारी इकाइयों हेतु लाइसेेंस निर्गत किये गये है, जिसमें से 176 इकाईयां संचालित हो चुकी हैं। 285 इकाईयों की स्थापना के बाद 73700 टीसीडी की अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग रू0 1241.25 करोड़ का पूंजीगत निवेश सहित लगभग 41़900 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोज़गार प्राप्त हो रहा है। प्रदेश में वर्ष 2017 तक एथेनॉल का कुल उत्पादन 42 करोड़ लीटर था, जो सत्र 2023-24 में बढ़कर 177 करोड़ हो गया है। देश में एथेनॉल उत्पादन मेें उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के किसानों को गन्न्ाा फसल के क्षेत्र में गत 07 वर्षाें में 36.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र फल में गन्न्ो के साथ अंतःफसली खेती करने से किसानों को 25 प्रतिशत की अतिरिक्त आय हुई है। ग्रामीण महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए प्रदेश के 37 जिलों में 3208 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिनमे 60092 ग्रामीण क्षेत्र की महिला उद्यमी के रूप मेें पंजीकृत हुई है। महिला स्वयं सहायता समूहो को अबतक रू0 6622.़92 लाख का अनुदान भी वितरित किया गया है। प्रदेश के किसान गन्न्ाा उत्पादन कर समृद्ध हो रहे है।

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