बाबा त्रिवटीनाथ मन्दिर में बसंतोत्सव एवं बही बसना कार्यक्रम

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बरेली। प्राचीनतम एवं भव्यतम बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर में बसंतोत्सव एवं बही बसना पूजन कार्यक्रम बड़े धूमधाम के साथ मनाया गया। मंदिर के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि हर वर्ष की भांति आज भी मंदिर के श्रीरामालय में बसंत पंचमी कार्यक्रम मनाया गया। मीडिया प्रभारी ने आज के दिन की महत्वता बताते हुये कहा कि सृष्टी की रचना करने के बाद ब्रह्मा जी को आभास हुआ कि अभी सृष्टि में पूर्णता नहीं है।तब ब्रह्मा जी ने मगवान विष्णु जी के मार्गदर्शन पर आदिशक्ति दुर्गा का आवाहन किया।उसी क्षण माघ शुक्ल की पंचम तिथी के दिन आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से श्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे तथा अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी “सरस्वती” कहा। माता सरस्वती के आज के दिन प्रकट होने पर बसंतोत्सव पूजन किया जाता है जोकि संगीत कला वाणी विद्या और ज्ञान की देवी है तथा उनकी आराधना से ज्ञान में वृद्धि होती है तथा आज से दिन कोई शुभ कार्य बिना किसी मुहूर्त के संपन्न होने से सफलता प्राप्त होती है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसी कारण मन्दिर समिति के बही बसना का पूजन भी हमेशा से आज बसंतोत्सव के पावन दिवस मन्दिर के सदस्यों द्वारा किया जाता है ।लगभग 100 वर्षों से नवीन वर्ष के हिसाब किताब के लिये आवश्यक बही का पूजन आज के ही दिन मन्दिर सेवा समिति द्वारा किया जाता रहा है। कार्यक्रम में श्री सरस्वती माता का पूजन तथा बही बसने का पूजन विधि विधान के साथ किया गया। बही बसना पूजन एवं बसंतोत्सव कार्यक्रम के उपरांत महा आरती में काफी संख्या में भक्तों ने आरती की तथा प्रसाद वितरण हुआ। आज के कार्यक्रम में मंदिर सेवा समिति के सुभाष मेहरा,प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल,हरिओम अग्रवाल, विनय कृष्ण अग्रवाल,प्रेम शंकर अग्रवाल,मानस पंत, का पूर्ण सहयोग रहा।

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