महाकुंभ में वॉटर वूमन शिप्रा ने भंडारे के प्रसाद के साथ बांटे पौधे
प्रयागराज। 144 साल बाद पड़ने वाले मुहूर्त में घटित होने वाला महाकुंभ में हर तरह के लोग चर्चा पा रहे हैं। जहां एक ओर कोई अपनी आंखों को लेकर वहीं दूसरी ओर कोई अपने बालों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। ऐसे में एक मातृ शक्ति शिप्रा पाठक के रूप में लगातार कछुआ गति से सुबह से लेकर शाम तक अपने प्लास्टिक मुक्त अभियान में अपनी पंचतत्व संस्था के माध्यम से लगी हुई हैं। देश में वॉटर वूमन के नाम से विख्यात शिप्रा सुबह अपने थाली थैला लेकर निकलती है और शाम तक जगह जगह महाकुंभ में शिप्रा इस वितरण करती है। पूछने पर बताया देर रात निकलकर कुंभ में भ्रमण करने पर कूड़ेदानों के द्वारा हमारी संस्था के लोग यह पता करते हैं कि प्लास्टिक का इस्तेमाल खाने में कहा हो रहा है वहीं हम लोग अगले दिन प्रमुखता से पहुंचते हैं। आज महाकुंभ में अपनी प्लास्टिक मुक्त अभियान के साथ साथ वॉटर वूमन शिप्रा पाठक ने अपने भंडारा प्रसाद वितरण के दौरान पौधे भी बांटे।आमजन को पौधे देते पर उन्होंने सभी को यह संकल्प दिलाया कि इन पौधों में त्रिवेणी की पावन मिट्टी है। ४० दिन चल रहे अनुष्ठान के मंत्र इन पौधों ने सुने हैं।अपने घर पर इन्हें रोपित करने से घर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। अतः सभी लोग इनकी देखभाल करके इनको वृक्ष बनाएं। शिप्रा पाठक ने महाकुंभ में अपने इस प्रयास के पीछे अध्यात्म जागरण से ही पर्यावरण जागरण का संभव होना बताया।शिप्रा पाठक इससे पहले नर्मदा,गोमती,शिप्रा, वरुणा आदि नदियों की पदयात्रा के अलावा अयोध्या से रामेश्वरम तक लगभग 13000 किमी की पदयात्रा कर दर्जनों नदियों के अविरल बहाव हेतु जलजागृति का काम अपनी अपनी पंचतत्व संस्था के माध्यम से कर रहीं हैं। शिप्रा ने महाकुंभ में एक थाली एक थैला अभियान चलाकर लाखों थाली थैला अखाड़ों, सफाई कर्मचारियों, पुलिस कर्मियों तक पहुंचाए है।इसके अलावा महाकुंभ में छोटी बच्ची अर्जिता के साथ शिप्रा पाठक के प्लास्टिक मुक्त अभियान के एक थाली एक थैला वाले फ्लेक्स भी सार्थक संदेश दे रहे हैं।













































































