परिजनों ने की लेखपाल के शव की डीएनए और सीबीआई जांच की मांग

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बरेली । उत्तर प्रदेश के बरेली की तहसील फरीदपुर में तैनात लेखपाल मनीष कश्यप का गुमशुदगी के 19 दिन बाद शव बरामद हुआ। परिजनों ने थाना फरीदपुर पुलिस और तहसील के अधिकारियों पर भी आरोप लगाया था। परिजनों ने एक ग्राम प्रधान और उसके भाई द्वारा अपहरण करके हत्या कर देने का अंदेशा जताया था। पुलिस ने रविवार को शव बरामद होने के बाद खुलासा किया कि लेखपाल का अपहरण फिरौती मांगने के उद्देश्य किया गया था और उसके कपड़े दिखाकर परिवार से फिरौती ली जाती। पुलिस के खुलासे से परिवार संतुष्ट नहीं हुआ और बरामद शव को मनीष कश्यप का ना बताते हुए आज जिला अधिकारी कार्यालय का घेराव किया और जिलाधिकारी से मिलकर डीएनए जांच करने तथा तहसील के कर्मचारी और अधिकारियों की और ग्राम प्रधान तथा उसके भाई की जांच कर कर दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की। दरअसल मृतक मनीष कश्यप अपने पिता की जगह पर मृतक आश्रित के तहत लेखपाल की नौकरी पर लगे थे और उनकी फरीदपुर तहसील में पोस्टिंग थी। परिजनों के अनुसार बीती 27 नवंबर को लेखपाल तहसील तो गए परंतु लौटकर घर नहीं पहुंचे। लेखपाल के घर ना पहुंच पाने पर परिजनों ने खल्लपुर के ग्राम प्रधान और उसके भाई पर आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन इन दोनों भाइयों ने दाब रखी है जिसके चलते मनीष कश्यप शासन को रिपोर्ट भेजने वाले थे। फरीदपुर तहसील के अधिकारियों और फरीदपुर पुलिस पर भी ग्राम प्रधान से मिलीभगत का आरोप लगाया था। थाना फरीदपुर पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर लेखपाल का परिवार पुलिस के अधिकारियों से भी मिला और बाद में परिवार जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा जहां पर पुलिस के सभी उच्च अधिकारी और जिलाधिकारी मौजूद थे जब अधिकारियों के सामने परिवार ने अपना दुखड़ा सुनाया तो फिर एडीजी रमित शर्मा ने इसका संज्ञान लिया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग कार्य को तत्काल कार्रवाई करने को कहा। क्योंकि परिवार का यह कहना था की फरीदपुर पुलिस से उन्हें न्याय नहीं मिलेगा तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इसकी जांच थाना फतेहगंज पश्चिमी से कराई। वही फतेहगंज पश्चिमी पुलिस द्वारा जांचोपरांत पता चला कि लेखपाल मनीष कश्यप का शव कैंट क्षेत्र में पड़ा है। तो मनीष कश्यप के सड़े-गले आधे शव को पुलिस ने कैंट से बरामद किया गया और आरोपी के घर से उसके कपड़े बरामद हुए।

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एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि 28 नवंबर को थाना फरीदपुर में लेखपाल मनीष कश्यप की गुमशुदगी दर्ज की गई थी। परिजनों ने बताया कि उन्हें थाने से न्याय नहीं मिल पाएगा तो फिर उन्होंने ने इसकी जांच थाना फतेहगंज पश्चिमी को ट्रांसफर कर दी थी और एसपी क्राइम द्वारा 4 टीमों का गठन किया गया था ,जिसमें एसओजी टीम, सर्विलांस टीम ,थाने की टीम, और साइबर सेल की टीम टीम को घटना के खुलासे के लिए लगाया गया था। रविवार को अवधेश उर्फ ओमवीर कश्यप की निशानदेही पर थाना कैंट क्षेत्र से मनीष कश्यप के शव के कुछ सड़े – गले अवशेष बरामद हुए। पुलिस ने लेखपाल मनीष कश्यप कपड़ों को भी बरामद किया और घटना में प्रयुक्त अर्टिगा कार तथा लेखपाल मनीष कश्यप की मोहरें और अन्य कागजातों को भी बरामद किया । आगे एसएसपी ने बताया कि मनीष कश्यप और ओमवीर कश्यप पिछले 6 माह से एक दूसरे से परिचित थे। इसी का फायदा उठाकर शराब पिलाने के बहाने फोन करके बीती 27 नवंबर को मनीष कश्यप को ओमवीर कश्यप ने बुलाया था। और अपनी अर्टिगा कर में बिठाकर अत्यधिक शराब पिलाई थी इसके बाद सूरज के मफलर से गला दबाकर मनीष कश्यप की हत्या कर दी। इस घटना के पीछे ओमवीर और सूरज का मकसद मनीष कश्यप के परिजनों से पैसे वसूलने का था। इस घटना में ओमवीर की पत्नी के मामा नेत्रपाल कश्यप और एक अन्य रिश्तेदार नन्हे कश्यप भी शामिल थे। ओमवीर के साथ एक अन्य को भी हिरासत में लेकर पुलिस ने पूछताछ शुरू की है। आगे एसएसपी ने बताया कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार करके उनके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस द्वारा बताई गई थ्योरी से लेखपाल मनीष कश्यप का परिवार संतुष्ट नहीं हुआ। लेखपाल संघ के कार्यकर्ताओं के साथ मनीष कश्यप के परिवार ने सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष योग…

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