दीपावली जीवन जीने की कला सिखाती है : आचार्य संजीव रूप

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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित आर्य समाज के तत्वावधान में स्थानीय प्रज्ञा एक मंदिर में दीपावली का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामवासी एकत्रित हुए तथा सामूहिक यज्ञ किया और 501 दिए जलाए ! इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा “दिवाली केवल आतिशबाजी चलाने मौज मस्ती करने का पर्व नहीं अपितु जीवन जीने की कला सीखने का पर्व है ! छोटे-छोटे दीपक एक पंक्ति में जलते हुए बहुत बड़ी शिक्षा देते हैं।

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वह पहली शिक्षा यह देते हैं कि एक रहो नेक रहो हंसते रहो मुस्कुराते रहो , चुनौतियों का सामना करो घबराओ मत यदि कोई दीपक बुझ जाता है तो साथ में रखे दीपक अपना कर्तव्य निभाते हैं और जलते रहते हैं अंतिम सांस तक ! जब तक दिए में तेल की एक बूंद भी रहती है तब तक दिया जलता है उसी प्रकार हम मनुष्यों को जीवन के अंतिम सांस तक अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए समाज में फैले हुए अज्ञान और बुराइयों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए ! कुमारी तृप्ति शास्त्री ने पर्व के विशेष मंत्रों का पाठ करते हुए यज्ञ में आहुतियां दिलवाई और कहा “दिवाली स्वच्छता का पर्व है , स्वच्छता मन की भी उतनी ही जरूरी है जितनी घर आंगन की । आज समाज मानसिक रोगी हो गया है । यह भ्रष्टाचार जातिवाद छुआछूत आदि मन के ही रोग है ! इस अवसर पर सुखबीर सिंह,संतोष कुमारी, विचित्रपाल सिंह. प्रश्रय आर्य मिथिलेश रानी, ईशा रानी. साहब सिंह, राकेश आर्य आदि मौजूद रहे!

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