उत्तर प्रदेश के कस्बों व ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था ‘राम भरोसे’- इलाहाबाद हाई कोर्ट

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों, कस्बों व ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ने और मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही पर सोमवार को तल्ख टिप्पणी की. हाई कोर्ट ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था ‘राम भरोसे’ चल रही है.

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राज्य के 5 मेडिकल कॉलेजों को एसजीपीजीआई स्तर का बनाएं
हाई कोर्ट ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोविड मरीज संतोष कुमार के लापता होने के मामले में डाक्टरों और मेडिकल स्टाफ की गंभीर लापरवाही मानते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा व स्वास्थ्य को जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया है. साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार को 4 महीने में यूपी के अस्पतालों में चिकित्सकीय ढांचा सुधारने और 5 मेडिकल कॉलेजों को एसजीपीजीआई स्तर का संस्थान बनाने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है

ग्रामीण क्षेत्रों में ICU, ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर की व्यवस्था करें
एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाजुक और कमजोर है. यह आम दिनों में भी जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. महामारी के दौर में इसका चरमरा जाना स्वाभाविक है. हाई कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के 20 बेड वाले सभी नर्सिंग होम में कम से कम 40 प्रतिशत बेड आईसीयू हों और इसमें 25 प्रतिशत वेंटिलेटर हों..

बाकी 25 प्रतिशत हाईफ्लो नसल बाइपाइप का इंतजाम होना चाहिए. साथ ही 30 बेड वाले नर्सिंग होम में अनिवार्य रूप से ऑक्सीजन प्लांट होना चाहिए. प्रयागराज, आगरा, कानपुर, गोरखपुर और मेरठ मेडिकल कॉलेजों को उच्चीकृत कर एसजीपीजीआई स्तर का संस्थान बनाए जाने का निर्देश इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को दिए हैं. हाई कोर्ट ने कहा कि इस काम के लिए सरकार भूमि अर्जन के आपातकालीन कानून का सहारा ले और धन उपलब्ध कराए. इन संस्थानों को कुछ हद तक स्वायत्तता भी दी जाए.

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लेवल टू की चकित्सा सुविधाएं हों
हाई कोर्ट ने कहा कि गांवों और कस्बों में सभी प्रकार की पैथालॉजी सुविधा और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लेवल टू स्तर की चकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाए. बी और सी ग्रेड के शहरों को कम से कम 20 आईसीयू एंबुलेंस दी जाए. गांवों में एंबुलेंस होनी चाहिए ताकि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके. कोर्ट ने यह सुविधा एक माह में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मेरठ मेडिकल कॉलेज से लापता कोविड मरीज संतोष कुमार को लेकर हाई कोर्ट ने कहा कि पीड़ित परिवार मुआवजा पाने का हकदार है.

इन सुझावों पर अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा हालात से दो चीजें स्पष्ट होती हैं, एक यह कि हमें देश में हर व्यक्ति को वैक्सीन लगानी है और दूसरा बेहतरीन स्वास्थ्य ढांचा खड़ा करना है. पीठ ने सुझाव दिया कि जो लोग गरीबों के लिए वैक्सीन खरीदना चाहते हैं उनको सरकार ऐसा करने की अनुमति दे तथा उनको आयकर में कुछ छूट दी जाए. हाई कोर्ट ने सरकार को इन सुझावों पर विचार कर अगली सुनवाई पर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. याचिका पर अगली सुनवाई 22 मई को होगी.

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