चांद पर पहुंच गए धरती पर रहना नहीं आया :आचार्य संजीव रूप

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बिल्सी। यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आज साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया । इस अवसर पर सामूहिक के यज्ञ का आयोजन किया गया यज्ञ के उपरांत यज्ञ के ब्रह्म वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा “संसार शांति चाहता है ! संघर्ष का परिणाम शांति होना चाहिए । व्यक्ति के अन्दर पैदा हुए ईर्ष्या द्वेष व महत्वाकांक्षएँ पारिवारिक कलह से लेकर युद्ध की विभीषिका तक पहुंचा देते हैं । विज्ञान ने तो खूब तरक्की की है हम चांद तारों तक पहुंच गए लेकिन धरती पर कैसे रहना यह हम नहीं सीख पाए । आज का मनुष्य भोगों की अंधी दौड़ में वेतहाशा दौड़ता चला जा रहा है । मानवीय मूल्य खत्म हो चुके हैं । अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता इस सोच के साथ आदमी जी रहा है।किंतु यह भी कटु सत्य है कि जिस धन के पीछे आदमी पागल हुआ है उस धन से बिस्तर तो मिल सकता है पर नींद नहीं, दवा मिल सकती है पर स्वास्थ्य नहीं,किताबें मिल सकती हैं पर ज्ञान नहीं, सुख के साधन मिल सकते हैं पर शांति नहीं । उन्होंने कहा ‘यूक्रेन और रूस में इजराइल फिलिस्तीन बांग्लादेश में लाखों निर्दोष लोग मारे जा चुके हैं , भारत शांति की पहल कर रहा है जो सराहनीय है । भारत ने सदैव शांति का संदेश दुनिया को दिया और मानवता का पाठ पढ़ाया है । हमें अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही शांति प्राप्त हो सकती है । और इसके लिए जरूरी है कि हम मजहब जाति व देश की सीमाओं से निकल कर संपूर्ण धरती को अपनी मां तथा धरती का खुद को पुत्र मानें और संसार के सब मनुष्यों तथा प्राणी मात्र को प्रेम करें । कुमारी तृप्ति शास्त्री कुमारी मोना आर्य कुमारी ईशा आर्य वेद पाठ किया तथा सुंदर भजन गाए । तृप्ति शास्त्री का भजन “है चार दिन का जीवन हंसकर गुजार दो, पाओ सभी का प्यार सभी को दुलार दो , सबको बहुत अच्छा लगा ‘ । इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे ।

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