परिषदीय शिक्षकों ने ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया

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बदायूँ। प्रदेश भर में 822 विकास क्षेत्र के शिक्षकों ने संबंधित ब्लाक संसाधन केदो पर महानिदेशक के ऑनलाइन हाजिरी देने के आदेश के विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। जिसके तहत आज जनपद बदायूं के भी 15 विकास क्षेत्र में शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों एवं शैक्षिक संवर्ग के लोगों ने दोपहर विद्यालय समय के पश्चात संबंधित ब्लाक संसाधन केदो पर पहुंचकर इस अव्यावहारिक आदेश पर रोष प्रकट करते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया। शिक्षकों से वार्ता करने पर उनके द्वारा बताया गया कि शासन स्तर पर शिक्षकों की मांगे बहुत पुराने समय से लंबी चली आ रही हैं उसे पर सरकार शिक्षकों के हित में कोई निर्णय नहीं ले रही है और शिक्षक को वर्ष भर में मात्र 14 दिन का आकस्मिक अवकाश देय है। शिक्षकों को ना तो उपार्जित अवकाश और ना ही कोई अर्थ दिवस अवकाश देय है। जबकि शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को उक्त अवकाश दिए जाते हैं तो शिक्षकों के साथ दोहरा व्यवहार क्यों करा जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षक शिक्षण कार्य के अतिरिक्त लगभग 25 से 30 ऐसे कार्य हैं जो की गैर शैक्षणिक है और जब शिक्षक उन कार्यों को निष्पादित करेंगे तो ऐसी स्थिति में प्रातः 8 बजे विद्यालय में उपस्थित देना अव्यावहारिक है। एक शिक्षिका से वार्ता करने पर उसने नाम न खोलने की शर्त पर कहा कि वह इंचार्ज प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत है उनका स्कूल जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर की दूरी पर है और मिड डे मील का चार्ज उन पर है ऐसे में रोज उन्हें विद्यालय समय से पूर्व सब्जी फल तेल मसाले आदि खरीद कर विद्यालय जाना पड़ता है और इसके साथ ही ना तो सड़के ठीक है और ना ही आवागमन के सुलभ साधन उपलब्ध है।जिला मंत्री उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि शिक्षकों की निगरानी के लिए संकुल शिक्षक, एआरपी, खंड शिक्षा अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समन्वयक से लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारी जिला अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी समय-समय पर विद्यालय में जाकर प्रेरणा एप के माध्यम से निरीक्षण करते हैं। जबकि अन्य विभागों के कर्मचारी 10 बजे के कार्यालय समय में 11 बजे तक भी नहीं मिलते हैं तो ऐसे में यदि ऑनलाइन उपस्थिति करनी है तो सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयो के बजाय समस्त विभागों के कर्मचारियों पर ऑनलाइन उपस्थिति लागू की जाए। जिला प्रवक्ता आयुष भारद्वाज ने कहा कि सबसे पहले शासन को चाहिए कि प्रतिवर्ष अंतर्जनपदीय स्थानांतरण किए जाएं, महिला शिक्षिकाओं को उनके निवास स्थल से अधिकतम 10 से 15 किलोमीटर की दूरी के विद्यालय मैं तैनाती दी जाए। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाए उसके पश्चात ही शिक्षक विद्यालय समय पर पहुंचकर सुचारू रूप से शिक्षण कार्य संपादित कर सकते है। जिला अध्यक्ष एवं प्रांतीय प्रचार मंत्री संजीव शर्मा ने कहा कि जब तक शिक्षकों की लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया जाएगा तब तक कोई भी शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी देने को तैयार नहीं है। शासन को चाहिए कि शिक्षकों की लंबित मांगों 1 सत्र में 31 उपार्जित अवकाश, द्वितीय शनिवार अवकाश, अर्थ दिवस अवकाश, समायोजन, अंतर्जनपदीय स्थानांतरण ,पदोन्नति आदि मांगे पूरी की जाए। तहसील प्रभारी प्रीति राठौर ने महिला शिक्षिकाओं से एकजुट होकर संघर्ष करने का आवाहन किया। ब्लॉक अध्यक्ष पंकज पाठक ने कहा कि सभी शिक्षकों को लंबित मांगे पूरी होने तक अनवरत संघर्ष के लिए तैयार रहे। संजीव शर्मा ने बताया कि आज विभिन्न विकास क्षेत्र से ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में जो प्रतिक्रिया आएगी उन सबको संकलित करके प्रदेश स्तर पर भेजा जाएगा। इस बीच 15 जुलाई को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को लंबित मांगों के पूरा न होने तक ऑनलाइन उपस्थिति न देने संबंधी ज्ञापन सोपा जाएगा। संचालक सुभाष चंद्र ने किया। इस दौरान अरुण सक्सेना, अमित यादव, युधिष्ठिर सुमन, श्वेता आर्य, प्रीति राठौर, कामिनी राठौर, कुसुम, अफ़ज़ाल, अनिल कुमार, सुनील, विजय शर्मा, सर्वेंद्र पाठक, वेद प्रकाश, नसीम, नदीम, निर्भान सिंह यादव, सिद्धांत वशिष्ठ, आयुष भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

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