प्रो सूर्य प्रकाश दीक्षित अटल साहित्य सम्मान से हुए विभूषित

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बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रांत के तत्वावधान में हुए अटल साहित्य सम्मान समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर डाॅ सूर्य प्रकाश दीक्षित को साहित्य में अविस्मरणीय योगदान के लिए अटल साहित्य सम्मान 2023 से विभूषित गया गया । सम्मान स्वरूप उन्हे 5100 रूपए की धनराशि, शाल, स्मृति चिन्ह नारियल और सम्मान पत्र देकर अलंकृत किया गया । चंद्रकांता आडीटोरियम में हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डा. अरुण कुमार, कार्यक्रम अध्यक्ष राष्ट्रधर्म के प्रबंध निदेशक डॉ. पवन पुत्र बादल, विशिष्ट अतिथि राजश्री ग्रुप की चेयरपर्सन डॉ. मोनिका अग्रवाल, डा. नवल किशोर गुप्ता, प्रांतीय अध्यक्ष डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा एवं प्रांतीय महामंत्री डाॅ शशि बाला राठी ने उन्हे यह सम्मान प्रदान किया। कवि रोहित राकेश, डाॅ एस पी मौर्य, वी के शर्मा, प्रभाकर मिश्र, प्रवीण कुमार शर्मा, डाॅ अखिलेश कुमार गुप्ता, वी सी दीक्षित ,डाॅ सी पी शर्मा राजबाला धैर्य आदि ने मंचासीन अतिथियों का माल्यार्पण एवं बैज लगाकर एवं तुलसी के गमले प्रदान कर स्वागत किया । इससे पूर्व मोहन चन्द्र पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। उमेश चंद्र गुप्ता ने अभिनन्दन गीत प्रस्तुत किया ।

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प्रांतीय संयुक्त मन्त्री रोहित राकेश ने अटल की चिरपरिचित कविता – “बाधाएं आती हैं आएं” सुनाई। प्रांतीय महामंत्री डाॅ शशि बाला राठी ने अतिथि परिचय एवं स्वागत भाषण प्रस्तुत किया । अटल साहित्य सम्मान के आयोजन के सम्बन्ध में प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रजप्रान्त हर देश के पूर्व प्रधानमन्त्री, प्रखर पत्रकार एवं ख्यातिलब्ध कवि अटल बिहारी बाजपेई की स्मृति मे प्रदेश के किसी बरिष्ठ साहित्यकार को अटल साहित्य सम्मान से सम्मानित करता है । इसी श्रंखला के अंतर्गत इस बर्ष का अटल साहित्य सम्मान प्रोफेसर दीक्षित जी को प्रदान किया जा रहा है ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ अरूण कुमार जी ने कहा कि अटल जी राजनीति के अजातशत्रु थे । उन्होने साहित्य परिषद द्वारा अटल साहित्य सम्मान का आयोजन करने के लिए परिषद की सराहना की । समारोह की विशिष्ट अतिथि बरिष्ठ साहित्यकार डाॅ मोनिका अग्रवाल ने कहा कि साहित्य संस्कृति ,संस्कारों और राष्ट्रीय चेतना की त्रिवेणी है । साहित्य समाज को रचनात्मक दिशा देने का कार्य करता है । विशिष्ट अतिथि डाॅ एन के गुप्ता ने कहा अटल जी राजनीतिक शुचिता के प्रतीक थे । अपने स्वागत से अभिभूत प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने भारत के गौरवमय अतीत पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होने कहा कि पृथ्वीराज चौहान के बाद देश से हिन्दू साम्राज्य का अंत हो गया । इसके बाद देश में हमारी संस्कृति ,सभ्यता और धर्म के पराभव का कालखंड प्रारम्भ हुआ। ऐसे में देश के साहित्यकारों ने अत्याचारों से पीड़ित जनता को भक्ति एवं धार्मिक चेतना का सम्वल प्रदान किया और भारतीय संस्कृति को अक्षुण्य रखा । कार्यक्रम अध्यक्ष डाॅ पवन पुत्र बादल ने अपने उद्ववोधन मे अटल विहारी बाजपेई के जीवन के कई प्रसंग साझा किए । उन्होने कहा कि अटल जी राष्ट्र धर्म मासिक के प्रथम सम्पादक थे । निर्भय सक्सेना ने अपनी कलम बरेली की पुस्तक प्रो दीक्षित एवम बादल जी को भेंट की। कार्यक्रम का संचालन डाॅ स्वाति गुप्ता ने किया । सभी का आभार डाॅ वी के शर्मा ने ब्यक्त किया । कार्यक्रम में रंजीत पांचाले, कमल सक्सेना, दिनेश चन्द्र शर्मा, सुरेन्द्र बीनू सिन्हा, प्रकाश चंद्र, निर्भय सक्सेना, वीरेंद्र अटल, प्रदीप श्रीवास्तव, रमेश गौतम, मुकेश सक्सेना, विनोद कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

निर्भय सक्सेना

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