शोध के लिए कल्पना शक्ति जरूरी- डा. निशांत

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शाहजहाँपुर। स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग में शोध प्रविधि विषय पर चल रही दो दिवसीय कार्यशाला का समापन हो गया । डा गौरव सक्सेना और डा. विजय तिवारी ने अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृतिचिन्ह भेंट किया। मुख्य वक्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यवसायिक प्रबंध विभाग के डा. निशांत कुमार ने कहा कि की उपयोगी शोध करने के लिए शोधार्थी को कल्पना शक्ति विकसित करनी चाहिए। कल्पना शक्ति ही सारे अविष्कारों की जननी है। इसीलिए डा. अब्दुल कलाम आज़ाद ने कहा था कि सपने देखना जरूरी है। कल्पना शक्ति का मूर्त रूप ही शोध का अन्तिम सोपान होता है।

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लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यवहारिक अर्थशास्त्र विभाग के डा. रंजीत सिंह ने कहा कि आजकल शोधार्थी शोध करने के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध सामाग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग कर रहे हैं ऐसा करने से उनकी अपनी क्षमता पूर्ण विकसित नहीं हो पाती है। इसलिए जहां तक संभव हो पुस्तकालय में पुस्तकें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए और अपनी बुद्धि का अधिकतम प्रयोग करना चाहिए । इस अवसर पर श्रेष्ठ प्रस्तुतिकरण के लिए सौरभ पांडेय, शिवम द्विवेदी ,गौरव माहेश्वरी को सम्मानित सम्मानित किया गया। डा. रूपक श्रीवास्तव के संचालन में हुए कार्यक्रम के अंत डा. कमलेश गौतम ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डा. अनुराग अग्रवाल, डा. अजय कुमार वर्मा डा. संतोष प्रताप सिंह, बृज लाली , अपर्णा त्रिपाठी, डा. मोहनी शंकर, पोथीराम, अखण्ड प्रताप सिंह, प्रशांत कुमार , विजय पाल, फैज़ मोहम्मद आदि उपस्थित रहे।

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