दरगाह ताजुशारिया पर जिलानी मियां और हामिद मियां का उर्स मनाया गया।
बरेली। आला हज़रत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के तीन दिवसीय 108वें उर्स-ए-रज़वी का आगाज़ शुरू हो चुका है। देश-विदेश से जायरीनों की आमद होना भी शुरू हो चुकी है। उर्स की सभी रस्में दरगाह ताजुशरिया के सज्जादानशीन काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रज़ा खां कादरी (असजद मिया) की सरपरस्ती में और जमात रज़ा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उर्स प्रभारी सलमान मियां की सदारत में व जमात के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां की निगरानी में दरगाह ताजुशरिया पर जिलानी मियां और हामिद मियां के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। जमात रज़ा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया बाद नमाज़-ए-फज्र दरगाह पर कुरानख्वानी और नात-ओ-मनकबत की महफिल सजाई गई। फिर सुबह 7:10 पर ताजुश्शरिया के वालिद इब्राहिम रजा खां (जिलानी मियां) के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। दिनभर दरगाह आला हजरत और दरगाह ताजुशरिया पर जायरीनों की हाजिरी व गुलपोशी का सिलसिला चलता रहा। फिर बाद नमाज-ए-मगरिब मिलाद-ए-मुस्तफा की महफिल सजाई गई। मुख्य कार्यक्रम का आगाज बाद नमाज-ए-ईशा कारी वसीम रजवी ने कुरान शरीफ़ की तिलावत से किया। सैय्यद कैफ़ी अली और नाईम रज़ा तहसीनी ने जिलानी मियां और हामिद मियां की शान में नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। देश विदेश से आए उलमा-ए-इकराम ने इब्राहिम रजा खां (जिलानी मियां) और हुज्जुतल इस्लाम (हामिद मियां ) की जिंदगी पर रौशनी डाली। मुफ्ती शाहजाद आलम ने अपनी तकरीर में कहा इस्लाम की हक्कानियत की दलील थे हुज्जतुल इस्लाम आला हजरत के बड़े सपूत थें। उस वक्त इल्मी दुनिया में आप से बढ़कर अरबी भाषा का माहिर शायद कोई और होगा। अपने वालिद के साथ हिन्दुस्तान की आजादी में कठिन परिश्रम किया है। मुफ्ती नश्तर फारूकी ने कहा इल्म इंसान के लिए बहुत जरूरी है, दुनिया का सबसे बेहतरीन काम पढ़ना और पढ़ाना है। यह ही काम हुज्जतुल इस्लाम ने पूरी जिंदगी किया। अल्लामा अब्दुल मुस्तफा रादोल्वी, मुफ्ती आशिक हुसैन, मुफ्ती शाहज़ाद आलम, मौलाना शकील, मुफ्ती नश्तर फारूकी, मुफ्ती अफजाल ने भी हुज्जतुल इस्लाम की फजीलत और तालीमात पर खिताब किया। फिर 10:35 पर हुज्जतुल इस्लाम (हामिद मियां) के कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी शर्फोद्दीन और मौलाना अब्दुल सत्तार ने और खुसूसी दुआ काज़ी-ए-हिन्दुस्तान मुफ्ती असजद मिया ने की। महफिल की निजामत मौलाना गुलजार ने की। इस मौके पर हुस्साम मियां, हुम्माम मियां, फैजू नबी, कारी काजिम, मौलाना सैय्यद अजीमुद्दीन अज़हरी, मौलाना सैय्यद फुरकान मियां, मौलाना शम्स, मौलाना आबिद आदि उलमा मौजूद रहें।देश-विदेश से पहुंचने लगें जायरीन जमात रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मियां ने बताया आला हजरत की मोहब्बत में 108वें उर्स-ए-रज़वी में देश-विदेश से जायरीनों का पहुंचना शुरू हो गया है जिसमें हिंदुस्तान के विभिन्न राज्यों उड़ीसा, बंगाल, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, केरला, बेंगलुरु, दिल्ली, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश के अलावा श्रीलंका, सऊदी अरब, मॉरीशस, तुर्की साउथ अफ्रीका, दुबई आदि देश-विदेश के अकीदतमंद शिरकत करने बरेली पहुंच चुके हैं।कल से दो दिन सिटी स्टेशन से मदरसा जामियातुर्रजा तक के लिए जायरीनों को मिलेंगी निशुल्क बसेंजमात रज़ा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान मिया ने बताया जायरीनों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी ना हो, उसके लिए दो दिन यानी कल साथ और आठ अगस्त को 24 घंटे सिटी स्टेशन से उर्स स्थल मदरसा जामियातुर्रजा तक के लिए काज़ी-ए-हिंदुस्तान की ओर से निशुल्क बसों का इंतजाम किया गया है। जो कैंप आठ अगस्त को रात 08 बजे तक समाप्त हो जाएगा।कल का कार्यकर्म जमात रज़ा के प्रवक्ता समरान खान ने बताया दूसरे दिन 07 अगस्त बरोज़ शुक्रवार (जुम्मा) को उर्स स्थाल मदरसा जामियातुर्रजा में बाद नमाज़े फजर कुरआन खव़ानी होगी। दोपहर 02 बजे काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद मिया हामिदी मस्जिद में जुम्मे की नमाज पढ़ाएंगे। बाद नमाज़े असर नातों मनकबत व हुजूर ताजुश्शरिया का 7 बजकर 14 मिनट पर कुल शरीफ़ होगा। मुख्य कार्यक्रम बाद नमाज़े ईशा इमाम अहमद रजा़ कॉन्फ्रेंस और देश-विदेश से आए उलमा-ए-किराम और सज्जादगान की तकरीर होगी। देर रात को 1 बजकर 40 मिनट पर सरकार आला हज़रत के छोटे साहबजादे सरकार मुफ्ती-ए-आज़म हिंद का कुल शरीफ़ होगा।उर्स की व्यवस्थाओं में समरान खान, कौसर अली, यासीन खान, हाफिज इकराम रज़ा, डॉक्टर मेंहदी हसन, मोईन खान, शमीम अहमद, अब्दुल्लाह रज़ा खां, दानिश रजा, बख्तियार खां, मौलाना निज़ामउद्दीन, मौलाना इंतज़ार अहमद, मोईन अख्तर, गुलाम हुसैन, रेहान रज़ा, आतिफ मिर्जा, रहबर खान, अली रजा, सैफ रज़ा कादरी, नावेद आलम, शाईबउद्दीन रज़वी, फैजान अहमद रज़ा, अमन खान, आदि लोग जायरीनों की खिदमत में लगे हुए हैं।















































































