धूप,बारिश,कोहरे को पार करते हुए वॉटर वुमन शिप्रा पाठक की पैदल यात्रा पहुँची सिवनी

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लखनऊ। अयोध्या से राम नाम का संकल्प लेकर निकलीं वाटर वूमेन शिप्रा पाठक की राम जानकी वन गमन पद यात्रा आज सिवनी पहुंची। दिन भर बारिश की बुंदों के बीच आज उनकी पद यात्रा चली। आज का पड़ाव गणेशगंज से 45 किलो मीटर चलकर सिवनी पहुँच कर था। वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने आज की पद यात्रा की दूरी घने कोहरे,तेज बारिश एवम ठंड के बीच तय की।ऐसा लगा मानो आज भगवान राम उनकी परीक्षा ले रहे हो।
राम जानकी की आस्था को अपना संकल्प मान कर शिप्रा सब चुनौतियों को पार करके सिवनी पहुँव गयी है।

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शिप्रा की सरयू से सागर नाम से जानी जा रही इस 4000 किमी की पदयात्रा को पूरे भारत में भक्ति,अध्यात्म और पर्यावरण की दृष्टि से देखा जा रहा है। जहां एक तरफ अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भी पद यात्रा का उत्साहित होकर जगह जगह राम भक्त स्वागत कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर प्रकृति प्रेमी भी जल संरक्षण के लिए वाटर वूमेन के कार्यों से प्रभावित होकर पदयात्रा में भाग ले रहे हैं।

शिप्रा अपनी पंच तत्व संस्था के माध्यम से भारत में जल,जंगल नदी संरक्षण के लिए कार्य के लिए जानी जाती है।अपनी इस कड़ी में शिप्रा मध्य प्रदेश की नर्मदा एवम शिप्रा नदी की पैदल यात्रा के अलावा उत्तर प्रदेश की आदि गंगा गोमती,सरयू,मंदाकिनी की पैदल यात्रा कर नदियों के किनारों पर समय समय पर पौधारोपण का कार्य कर उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित करती हैं। शिप्रा पाठक की इस पद यात्रा का मुख्य उद्देश्य आज के युवाओं को भगवान राम जानकी के पूजन से ज्यादा उनके कार्यों को आत्मसात करने के अलावा राम जानकी वन गमन पथ को रामायणकालीन हरा भरा करने का है।

इसके लिए जगह जगह लोगों के सहयोग से राम जानकी वाटिका भी स्थापित कराएंगी। शिप्रा के स्वागत में रामभक्तों ने जगह जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया।जानकी माता के प्रति शिप्रा का भक्ति भाव देखते हुए सिवनी में प्रवेश करते ही सकड़ों महिलाओं ने उनका माला पहनाकर स्वागत किया। शिप्रा पाठक की पद यात्रा का अगला पड़ाव महाराष्ट्र की सीमा में प्रवेश कर रामटेक होगा। शिप्रा की ये पैदल यात्रा उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़,महाराष्ट्र कर्नाटक,केरल,आंध्र प्रदेश होकर रामेश्वरम तमिलनाडु के जंगलों से होते हुए निकल रही है।

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