17 जनवरी को सार्वजनिक होगी मूर्ति, मीडिया में वायरल हो रही प्रतिमा पर ट्रस्ट ने तोड़ी चुप्पी

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अयोध्या। भव्य राम मंदिर में स्थापित करने के लिए रामलला की तीन मूर्तियों में से एक मूर्ति का चयन हो गया है। हालांकि, इसको लेकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई बयान जारी नहीं किया गया है। ट्रस्ट के सूत्र बताते हैं कि नई मूर्ति 17 जनवरी को सार्वजनिक की जाएगी। इस दिन रामलला यानी चयनित अचल मूर्ति को शोभायात्रा के जरिये नगर भ्रमण कराया जाएगा। सोशल मीडिया पर मूर्तिकार अरुण योगीराज की फोटो के साथ रामदरबार की वायरल हो रही मूर्ति के सवाल पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि वे इस पर कुछ नहीं कहेंगे। रामलला की अचल मूर्ति के दर्शन के लिए इंतजार करना होगा। उधर, राममंदिर ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने साफ कहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। गर्भगृह में रामदरबार नहीं बल्कि रामलला की बाल स्वरूप प्रतिमा स्थापित की जाएगी। कौन सी प्रतिमा स्थापित होनी है, इसका अंतिम निर्णय ट्रस्ट को ही करना है। हालांकि, यह लगभग तय है कि कर्नाटक के प्रख्यात मूर्तिकार अरुण योगीराज की बनाई गई रामलला की मूर्ति राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित की जाएगी। पिछले दिनों मूर्ति चयन को लेकर हुई वोटिंग में योगीराज की ओर से कृष्णशिला पर बनाई गई मूर्ति पर सहमति बन गई है। इंतजार सिर्फ ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक घोषणा करने का है। उधर, सोशल मीडिया पर भी अरुण योगीराज की बनाई मूर्ति के चयन की खबरें वायरल हो रही हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी अरुण योगीराज की अचल मूर्ति के चयन की बात कही है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी है कि तीन मूर्तिकारों में से कर्नाटक के जाने माने मूर्तिकार योगीराज अरुण की बनाई मूर्ति पर मुहर लगी है।अरुण योगीराज मूलतः कर्नाटक के मैसूर से हैं। उनके परिवार में एक से बढ़कर एक मूर्तिकार रहे हैं। उनकी पांच पीढ़ियां मूर्ति बनाने या तराशने का काम कर रही हैं। अरुण को बचपन से ही मूर्ति बनाने का शौक था। अरुण ने एमबीए किया है। इसके बाद वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगे, लेकिन मूर्तिकला को नहीं भूल पाए। आखिरकार साल 2008 में जॉब छोड़कर उन्होंने मूर्तिकला में कॅरियर बनाने का रिस्क लिया। उनका रिस्क सफल रहा। वे देश के जानेमाने मूर्तिकार बन गए। अरुण योगीराज ने इंडिया गेट पर लगी नेता जी सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट की मूर्ति तैयार की थी। इस मूर्ति को बोस की 125वीं जयंती पर लगाया गया था। इस दौरान अरुण ने पीएम मोदी को भी बोस की दो फीट की प्रतिमा भेंट की थी। इसके लिए अरुण योगीराज का पीएम मोदी ने आभार भी जताया था। अरुण के दादा बसवन्ना शिल्पी भी जाने माने मूर्तिकार थे। उन्हें मैसूर के राजा का संरक्षण हासिल था।केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की 12 फीट ऊंची प्रतिमा। मैसूर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस की प्रतिमा। मैसूर के राजा की 14.5 फीट ऊंची सफेद अमृत शिला प्रतिमा। मैसूर के चुंचनकट्टे में हनुमानजी की 21 फीट ऊंची प्रतिमा। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आंबेडकर की 15 फीट ऊंची प्रतिमा।

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