ग्रे नो द्वारा गांवों में विकास कार्य न कराए जाने के विरोध में जल्द होगी पंचायत

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नई दिल्ली।।नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण की लगभग 288 ग्राम पंचायतों को औद्योगिक नगरीय क्षेत्र घोषित करने के बाद जब से इन गांवों में पंचायत पुनर्गठन बंद किया गया है यह गांव बदहाली का रोना रो रहे हैं। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों का इन गांवों के विकास और सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
यहां तक कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा डेढ़ दो वर्ष पूर्व दर्जनों गांवों को स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया था लेकिन इन गांवों का स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होना तो बहुत दूर की बात रहा उल्टे यह गांव मलवे की ढेर में तब्दील होते जा रहे हैं। इन गांवों के जलमग्न रास्ते और कीचड़ भरी नालियां से आती दुर्गंध और रास्तों में फैला कूड़ा करकट, सफाई के नाम पर हो रही खानापूर्ति गांव की बदहाली बयां करती नजर आ रही है। लेकिन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी सेक्टर्स की स्वच्छता और विकास कार्यों का विजिट करते तो नजर आते हैं लेकिन किसी भी गांव की तरफ इन्होंने अपना रुख करना मुनासिब नहीं समझा है। इतना ही नहीं ग्रेटर नोएडा के नगरीय क्षेत्र घोषित गांवों के विकास पर जन प्रतिनिधियों की भी आमतौर पर चुप्पी नजर आती है। जनप्रतिनिधि भी शहरी सेक्टर्स और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज के लोगों की समस्याओं को तो सुनते नजर आते हैं लेकिन गांवों के लोगों की तरफ इनका भी कोई विशेष फोकस नजर नहीं आ रहा है।

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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का गांवों की अनदेखी का इससे बड़ा कोई जीवन्त उदाहरण नहीं हो सकता कि गांव मिलक लच्छी को डेढ वर्ष पूर्व स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने के लिए चयनित किया गया था लेकिन इस गांव में आज तक कोई विकास कार्य नहीं हो सका है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पता तो यहां तक चला है कि स्मार्ट विलेज के लिए विकास कार्यों के जो मानक बनाए गए हैं मिलक लच्छी के लिए कम्युनिटी सेंटर निर्माण कार्य, स्कूल निर्माण कार्य, खेलकूद का मैदान, लाइब्रेरी का निर्माण कराने जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल ही नहीं किया गया है। जबकि विगत सत्र के दौरान यह मामला उत्तर प्रदेश विधानसभा में मदन भैया विधायक द्वारा भी उठाया जा चुका है। सच्चाई तो यही है कि उस ग्रेटर नोएडा और नोएडा के अधिकारियों के लिए विधानसभा और संसद में उठाए गए प्रश्नों की अनदेखी करना कोई बड़ी बात नहीं है जहां आए दिन किसानों के घेराव के बाद भी कान पर जूं नहीं रेंगती है। इसीलिए इन प्राधिकरणों के अधिकारियों के सामने जनप्रतिनिधि लाचार और मजबूर नजर आते हैं। वर्तमान सीईओ ग्रेटर नोएडा की अभी तक की कार्यशैली जरूर प्रशंसनीय रही है दूसरी तरफ यीडा के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह भी गांव देहात और किसान हित के मुद्दों पर संजीदा नजर आते हैं। लेकिन जब तक ग्रेटर नोएडा के सीईओ अपने मातहत अधिकारियों की लगाम नहीं कसेंगे तब तक गांवों के लोग नारकीय जीवन जीने के लिए मजबूर होते रहेंगे। इसलिए औद्योगिक नगरीय क्षेत्र घोषित गांवों के विकास में की जा रही हीला हवेली और अनदेखी के विरोध में गांव मिलक लच्छी केवा वाशिंदों द्वारा जल्दी ही एक पंचायत आयोजित करने का फैसला लिया गया है जिसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा गांव की विकास की अनदेखी के विरुद्ध आवाज उठाई जाएगी। अगर गांवों को विकास से वंचित किया गया तो संभव है कि इन गांवों के लोग आगामी संसदीय चुनाव के बहिष्कार पर भी निर्णय लेने के लिए बाध्य होंगे।

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