एलर्जी का शिकार, तो इन आयुर्वेदिक उपायों से पाएं राहत

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नई दिल्ली। नवंबर की शुरुआत के साथ ही मौसम में बदलाव भी होने लगा है। हल्की ठंड के साथ एक तरफ जहां सर्दियों ने दस्तक दे दी है, तो वहीं दूसरी तरफ प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। हर मौसम अपने साथ कई तरह की समस्याएं और एलर्जी लेकर आता है। खासकर सर्दियों में मौसम में अक्सर लोग धूल की वजह से होने वाली एलर्जी से परेशान रहते हैं,जो लगातार छींक और खांसी की वजह बन जाती है। ऐसे में आप कुछ आयुर्वेदिक उपायों की मदद से खुद को डस्ट एलर्जी से बचा सकते हैं। अपने औषधीय गुणों की वजह से कई समस्याओं का रामबाण इलाज मानी जाती है। खासतौर पर हल्दी वाला दूध कई समस्याओं का अचूक इलाज माना जाता है। अगर आप अक्सर डस्ट एलर्जी का शिकार होते रहते हैं, तो हल्दी वाला  जरूर पिएं। इसके लिए एक कप दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर गर्म करें और फिर इसमें शहद मिलाकर इसे सोने से पहले पी लें। यह न सिर्फ आपकी एलर्जी दूर करेगा, बल्कि आपकी इम्युनिटी भी मजबूत करेगा। हल्दी एक प्राकृतिक डिकॉन्गेस्टेंट के रूप में कार्य करती है और हिस्टामाइन के रिलीज को कम करती है, जो एलर्जी के लिए जिम्मेदार है। डस्ट एलर्जी से राहत पाने के लिए आप की पी सकते हैं। इसे बनाने के लिए एक कप गर्म पानी में एक चम्मच पुदीने की सूखी पत्तियां और शहद मिलाकर चाय बना लें। पुदीना के एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिकॉन्गेस्टेंट गुणों के कारण, धूल से होने वाली एलर्जी के लक्षणों जैसे कंजेशन, छींक, खांसी और बहती नाक आदि से राहत मिलती है।आयुर्वेद में शहद का अपना काफी महत्व है। अपने गुणों की वजह से यह कई समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। डस्ट एलर्जी से राहत पाने के लिए आप शहद का इस्तेमाल कर सकते हैं। रोजाना दो चम्मच शहद का सेवन एलर्जी वाले खतरनाक कारकों के खिलाफ एक ढाल की तरह काम करते हैं। टी यूं तो कई तरह से सेहत को फायदा पहुंचाती है, लेकिन आमतौर पर लोग इसे वजन घटाने के लिए इस्तेमाल करते है। हालांक, वेट लॉस के अलावा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ग्रीन टी एलर्जी के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। खासकर धूल और गंदगी के कारण होने वाली एलर्जी से बचाव में यह काफी मददगार है। अगर आप अक्सर डस्ट एलर्जी से परेशान रहते हैं, तो गाय का घी इसमें आपकी काफी मदद करता है। रोज सुबह शुद्ध गाय के घी की दो बूंदें अपनी नाक में डालने से एलर्जी और धूल के कण के बचाव के लिए एक सुरक्षात्मक परत बन जाती है। यह धूल के कणों को खांसी, छींकने और नाक बहने जैसे लक्षणों को ट्रिगर करने से रोकता है।

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