‘प्रोफेसर’ बना बस्तर का किसान,पत्रकारिता पढ़ाएंगे देश के अव्वल संस्थान में

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छत्तीसगढ़। प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली एक बड़ी खबर बस्तर से आ रही है। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव (बस्तर) के किसान डॉ राजाराम त्रिपाठी को “पत्रकारिता एवं प्रबंधन” की उच्च शिक्षा के लिये ख्यातिप्राप्त, देश के अग्रणी संस्थान “जागरण इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड मॉस कम्युनिकेशन” (जिम्सी) का “प्रोफेसर” नियुक्त किया गया है। उल्लेखनीय है कि ‘कृषि-पत्रकारिता’ तथा ‘ग्रामीण-पत्रकारिता’ सहित पत्रकारिता के दर्जन से भी ज्यादा विषयों में डिग्री,डिप्लोमा, स्नातकोत्तर तथा शोध की सुविधा देने वाला देश का यह अपनी तरह का इकलौता अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान है। कानपुर तथा दिल्ली नोएडा में यह स्थित है। विशेष रूप से कृषि-पत्रकारिता तथा विज्ञान संचार विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शिक्षा तथा डिग्री प्रदान करने वाला देश का यह पहला और इकलौता संस्थान माना जाता है। यहां देश-विदेश के छात्र देश के ही नहीं विदेशों के छात्र भी इन अनूठे महत्वपूर्ण विषयों की शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। वैसे तो बस्तर की धरती में जन्मे छत्तीसगढ़ के सपूत डॉ राजाराम त्रिपाठी का नाम आज देश दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। बीएससी (गणित),एलएलबी , पांच-पांच विषयों में एमए, डॉक्टरेट की डिग्री के साथ डॉ. त्रिपाठी देश के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे किसान माने जाते हैं। देश की खेती और किसानों को पिछले 30 सालों में कई नई लाभदायक कृषि तकनीकें तथा ज्यादा उत्पादन एवं लाभ मुनाफा देने वाली काली-मिर्च, सफेद मुसली, स्टीविया,आस्ट्रेलियन टीक की नई नई फसलों की तकनीक तथा सफल किस्में देने वाले कोंडागांव के इस किसान ने सफलता के कई अभूतपूर्व कीर्तिमान गढ़े हैं, और अंचल तथा प्रदेश को ही नहीं बल्कि पूरे देश को वैश्विक मंच पर भी गौरवान्वित किया है। हाल ही में उन्हें पांचवी-बार देश का “सर्वश्रेष्ठ-किसान अवार्ड” देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हाथों दिये जाने की पूरे देश में चर्चा रही है। लेकिन इस बार चर्चा एकदम अलग हटकर है। हमारे देश में किसानों को प्रायः अनपढ़ अथवा कम पढ़ा-लिखा माने जाने की रिवायत रही है। ऐसे में देश के सबसे पिछड़े क्षेत्र माने जाने वाले बस्तर के इस किसान की पत्रकारिता एवं प्रबंधन की उच्च शिक्षा के लिए ख्यातिप्राप्त देश के अग्रणी संस्थान “जागरण इंस्टिट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड मॉस कम्युनिकेशन” (जिम्सी) के “प्रोफेसर” के रूप में नियुक्ति को अनूठे तथा क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस अनूठी पहल के लिए निश्चित रूप से जिम्सी संस्था का प्रबंधन बधाई का पात्र है। जिम्सी के निदेशक , कृषि तथा ग्रामीण पत्रकारिता के देश के पुरोधा माने जाने वाले डॉ. उपेंद्रनाथ पाण्डेय कहते हैं कि कृषि में सतत नवाचार के साथ ही कलम के भी धनी डॉ त्रिपाठी कॉलेज की दिनों से ही ग्रामीण तथा कृषि पत्रकारिता से गहराई से जुड़े हुए हैं। इन विषयों के वे देश के पहली पंक्ति के स्तंभकार है। इन्होंने लगभग तीन दर्जन देशों की यात्रा करके उन देशों की कृषि पद्धति, कृषि समस्या तथा वैश्विक विपणन व्यवस्था का विशद जमीनी अध्ययन किया है। दर्जनों प्रतिष्ठित अवॉर्ड इनकी कलम नाम हैं। जिम्सी (JIMMC ) डॉ त्रिपाठी के इस विशिष्ट ज्ञान तथा जमीनी अनुभवों का लाभ अपने छात्रों को देना चाहता है। इसलिए हमने इन्हें अपनी संस्था के साथ जुड़ने का प्रस्ताव रखा। डॉक्टर त्रिपाठी भी यह मानते हैं कि पत्रकारों की आने वाली पीढ़ी को असली भारत यानी देश के 70% गांवों तथा देश के मूल व्यवसाय कृषि व कृषि संबद्ध उपक्रमों के बारे में जानना समझना जरूरी है। इसीलिए उन्होंने हमारे अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। अब डॉक्टर त्रिपाठी खेती के साथ ही समय-समय पर कृषि, तथा ग्रामीण पत्रकारिता के उच्च पाठ्यक्रमों में देश- विदेश के भावी पत्रकारों तथा पत्रकारिता के शोधार्थियों को कृषि तथा ग्रामीण पत्रकारिता पढ़ाएंगे तथा उनका मार्गदर्शन करेंगे। बस्तर छत्तीसगढ़ के किसान की देश के देश के नंबर एक संस्थान में ‘प्रोफेसर’ के रूप में नियुक्ति की इस खुशखबरी से छत्तीसगढ़ के किसान ही नहीं बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित है।

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