विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन

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बदायूँ। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में माननीय जनपद न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं के निर्देशानुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं द्वारा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त तत्वाधान में महिलाओं के हित संरक्षण के कानून से सम्बन्धित विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन जनपद की तहसील सहसवान में स्थित शिवलता इण्टर कॉलेज, उस्मानपुर, सहसवान, बदायूं में आयोजित किया गया। उक्त शिविर का शुभारम्भ अपर जिला एव सत्र न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं सारिका गोयल की अध्यक्षता में अपरान्ह् 11ः30 बजे से किया गया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से उपस्थित डॉ0 शगुफ्ता एवं डॉ0 प्रीती माहेश्वरी द्वारा अपने-अपने वक्तव्य में महिलाओं के स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जानकारियां दी गयीं एवं महिलाओं को सरवाइकल कैंसर के बारे में जागरूक किया गया। इसी क्रम में वीडियो के माध्यम से सरवाइकल कैंसर के प्रारम्भिक लक्षण एवं सरवाइकल कैंसर की टेस्टिंग एवं बचाव के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया। इसके उपरान्त असिस्टेन्ट एल0ए0डी0सी0 कु0 कशिश सक्सेना द्वारा विस्तृत रूप में परिवार, क्रिमिनल, सिविल, लेबर आदि के सम्बन्ध में विधिक जानकारियां देते हुये अपील की गयी कि महिलायें सजग रहें ताकि उनका उत्पीड़न न हो सके। इसी क्रम में रिसोर्स परसन/नामिका अधिवक्ता संतोष कुमार सक्सेना द्वारा अपने वक्तव्य में महिलाओं को अपने अधिकारों के सम्बन्ध में जानकारियां देते हुये क्रिमिनल एवं सिविल सम्बन्धित विधि-व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया। इसके उपरान्त उपस्थित उप-निरीक्षक अमृता सिंह द्वारा महिलाओं हेतु सरकार द्वारा चलायी जा रही पुलिस व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से जानकारियां दी गयीं।

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उक्त शिविर के अन्त में सारिका गोयल- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूं द्वारा अपने वक्तव्य में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, द्वारा आम-जनता की विधिक समस्याओं को किये जाने वाले उपचार से अवगत कराया। इसके साथ ही नालसा तथा राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा महिलाओं के लिए किये जाने वाले कार्यो की चर्चा की व महिलाओं को अवगत कराया कि किसी भी महिला को किसी से डरने की आवश्यकता नहीं उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। निर्भया कांड के बाद महिलाओं संबंधी अपराधों में किये गये बदलाव व पॉक्सो अधिनियम की चर्चा की तथा बताया गया कि इस अधिनियम के अन्तर्गत पीड़िता व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी जायेगी तथा अपराधी के लिए गम्भीर सजा का प्रावधान किया गया है। पीड़िता को आर्थिक रूप से सहायता के लिए पीड़िता क्षतिपूर्ति योजना तथा रानी लक्ष्मी बाई योजना की जानकारी दी। महलाओं के सम्पत्ति पर बराबर के हक, कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीडन से बचाने के प्रावधान, विशाखा गाइडलाइन तथा समान वेतन के अधिकारों के बारे में बताया गया। इसके अतिरिक्त महिलाओं को उनकी शक्ति से परिचय कराते हुये कहा कि महिला हर स्तर पर परिवार की एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है, जो कि इंटों की दीवारों को परिवार बनाती है, यदि महिला चाहे तो समाज में महिलाओं के प्रति अपराधों को कुछ हद तक कम कर सकती है क्योंकि महिला अपने पिता, पति, भाई एवं पुत्र को अनेकों तरीके से अन्य महिलाओं के सम्मान करने के लिये प्रेरित कर सकती है। इसके अतिरिक्त महिला जो कभी परिवार में बहू बनकर आई थी और आज सास है तो एक बहू को हो रही परेशानियों को समझ सकती है, जिसे वह बड़ी आसानी से उसकी परेशानियों का निदान कर सकती है, इस पर उदाहरण देते हुये कहा कि जिस प्रकार एक पौधा जब एक जगह से दूसरी जगह पर लगाया जाता है तो उसे पूर्ण रूप से लगाने हेतु बहुत यत्न करने पड़ते है उसी प्रकार दूसरे घर से आई बच्ची को भी उसके ससुराल में पूर्ण रूप से समायाजित किये जाने हेतु आवश्यक यत्न किये जायें। अन्त में सभी सहभागिताओं को धन्यवाद कर पठन सामग्री का वितरण किया गया एवं अपील की गयी कि उपस्थित सभी महिआएं सम्बन्धित क्षेत्र में उक्त समस्त जानकारियों उनके मिलने वाले लोगों को अवश्य दें।

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