हिंदी साहित्यकारों की साहित्यिक विरासत शीर्षक पर विचार गोष्ठी हुई

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बदायू। राजकीय महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग में महाविद्यालय प्राचार्या डॉ स्मिता जैन के नेतृत्व में तथा हिंदी विभाग विभागाध्यक्ष डॉ वंदना के निर्देशन में आज शासन द्वारा प्रदत रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत प्राप्त त्रिवर्षीय शोध परियोजना आजादी के 75 वर्षों में जनपद के हिंदी साहित्यकारों की साहित्यिक विरासत शीर्षक पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।शोध परियोजना में बदायूं जनपद के देश विदेश में विख्यात 10 साहित्यकारों की साहित्यिक विरासत पर प्रकाश डाला गया, कार्यक्रम में फानी बदायूनी, शकील बदायूनी ,पंडित भूप राम शर्मा, डॉ बृजेंद्र अवस्थी, डॉ महोदत्त साथी, डॉ उर्मिलेश शंखधार , डॉ महाश्वेता चतुर्वेदी, डॉ राम बहादुर व्यथित, डॉ ममता नौगरैया, डॉ गीतांजलि सक्सेना जी के संपूर्ण साहित्यिक जीवन पर सभी ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणा वादिनी का आशीष लेकर किया गया एवं शोध के लिए चयनित सभी साहित्यकारों एवं उनकी जगह पर आए हुए उनके परिवार के प्रतिनिधि जनों का महाविद्यालय प्राचार्या के द्वारा शॉल आवरण एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया तत्पश्चात कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुये,फानी बदायूनी एवं शकील बदायूनी के समग्र साहित्य पर डॉ राम बहादुर व्यथित जी ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

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पंडित भूप राम शर्मा एवं डॉ उर्मिलेश शंखधार के साहित्य एवं उनके जीवन पर डॉक्टर अक्षत आशेष ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ बृजेंद्र अवस्थी जी के प्रतिनिधि के रूप में उनके पुत्र श्री शतन्जय कार्यक्रम में आए हुए थे एवं अवस्थी जी की कविताएं कुलदीप अंगार जी द्वारा प्रस्तुत की गई। मोह दत्त साथी जी के प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम में पधारे हुए उनके पुत्र आलोक कुमार गौड़ जी ने अपने पिता के साहित्य की कई कविताओं की विवेचना प्रस्तुत की। डॉक्टर महाश्वेता चतुर्वेदी जी के प्रतिनिधि के रूप में आए हुए डॉ शिवदत्त भारद्वाज जी ने महाश्वेता जी की समस्त रचनाओं के विषय में जानकारी प्रदान किया डॉ राम बहादुर व्यथित जी ने अपनी समस्त रचनाओं का सार प्रस्तुत किया एवं गद्य विधा की छोटी-छोटी खूबियों को सभी के बीच में बताया। ममता नौगरैया जी के साथ कार्यक्रम में पधारे हुए बदायूं जनपद के चिकित्सकों में अपनी अहम पहचान बनाए हुए डॉक्टर सुरेश चंद्र नौगरैया जी ने डॉ ममता नैगरैया के साहित्यिक जीवन एवं सांसारिक जीवन में बने हुए सामंजस्य को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में गीतांजलि सक्सेना जी के एवं शोध में नामित सभी साहित्यकारों के जीवन पर डॉ कमला माहेश्वरी जी ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ शुभ्रा माहेश्वरी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ममता सागर ने किया शोध परियोजना की इस विचार गोष्ठी में मधु राकेश,डॉ अंशु सत्यार्थी ,डॉ रामकुमार, डॉ उमा गौर, डॉ इंदु शर्मा, श्री पवन शंखधर, डॉ राजधन, डॉ सतीश कुमार, डॉ बृजेश कुमार, डॉ ऋषभ भारद्वाज, डॉ भावना सिंह, डॉ सरिता गौतम, डॉ आशुतोष, डॉ अनीता सिंह, सीताराम जी , रोहित कुमार, राजीव पाली एवं महाविद्यालय में शोध छात्र सचिन कुमार, मनोज कनौजिया ,प्रीति कुमारी अर्चना तिवारी, एवं महाविद्यालय की छात्राएं मौजूद रहीं।

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