GDP में MSME की हिस्सेदारी को 50 फीसद तक ले जाने की तैयारी

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सरकार वर्ष 2030 तक जीडीपी में एमएसएमई की हिस्सेदारी को 50 फीसद तक ले जाने की तैयारी में जुट गई है। फिलहाल जीडीपी में एमएसएमई की हिस्सेदारी 30 फीसद है। एमएसएमई मंत्रालय ने हाल ही में इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए की कई प्रयास शुरू किए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी सेक्टर की सप्लाई चेन में एमएसएमई को शामिल करने, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत उद्यमियों को सरकारी जेम पोर्टल पर बिक्री की सुविधा देने व एमएसएमई की समस्याओं को फौरी तौर पर निपटाने के लिए चैंपियंस 2.0 पोर्टल लॉंच करने जैसे कदम शामिल हैं। दूसरी तरफ, एमएसएमई निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी बैंकों को उन्हें सस्ती दरों पर लोन मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में गत बुधवार को एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कारपोरेशन लिमिटेड (ईसीजीसी) के साथ 21 बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एमएसएमई को सस्ती दरों पर लोन आश्वस्त करने के लिए बैठक की गई। एमएसएमई मंत्रालय के मुताबिक सरकारी ई-मार्केट (जेम) पोर्टल पर दूरदराज में स्थित छोटे-छोटे उद्यमियों को बिक्री का मौका दिलाने के लिए उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत उद्यमियों के डाटा को जेम के साथ शेयर किया जा रहा है। एमएसएमई मंत्रालय की तरफ से विकसित उद्यम पोर्टल पर अब तक दो करोड़ से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हो चुके हैं। हालांकि देश में छह करोड़ से अधिक एमएसएमई है। एमएसएमई मंत्रालय की तरफ से दो दिन पहले नवीनतम तकनीकी फीचर्स से लैस चैंपियन 2.0 पोर्टल लाॉंच किया गया है, जहां उद्यमियों की शिकायतों को तय समय में दूर करने की कोशिश की जाएगी। यह पोर्टल 11 भाषाओं में उपलब्ध होगा। जीडीपी में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी सेक्टर में भी एमसएमई को आगे लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्रालय के प्रयास से नेशनल स्माल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया चेन्नई व हैदराबाद में सेंटर ऑफ एक्सलेंस की स्थापना करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की सप्लाई चेन में एमएसएमई को लाने के लिए बड़ी कंपनियों को उन्हें मदद करने के लिए कहा गया है। सरकार सैकड़ों वस्तुओं के लिए कॉवालिटी कंट्रोल नियम ला रही है और देर-सवेर एमएसएमई को भी उन नियमों का मानना होगा। इसका फायदा यह होगा छोटे उद्यमी भी संगठित होते जाएंगे और उनकी वस्तुएं भी क्वॉलिटी वाली होंगी, जिससे उन्हें निर्यात का मौका मिलेगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन स्माल मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज का मानना है कि जीडीपी में एमएसएमई की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मीडियम उद्यमियों की संख्या को बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि अभी देश में सिर्फ 15-20 हजार मीडियम इंटरप्राइजेज है, जिनकी संख्या को दो लाख तक ले जाना होगा। क्योंकि ये कंपनियां ही सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव जैसी स्कीम का लाभ ले सकती है। बड़े पैमाने पर उत्पादन करना होगा।

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