बदायूं में बिजलिकर्मियो की 72 घंटे की हड़ताल, लेखपालों को तैनात किया

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हड़ताली बिजली कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन कर की जोरदार नारेबाजी

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बदायू। उप्र के बिजलीकर्मियों की 72 घण्टे की हड़ताल 18 घंटे हुए पूरे : उप्र के बिजलीकर्मियों की हड़ताल के समर्थन में देशभर के 27 लाख बिजलीकर्मी सड़कों पर उतरे : शान्तिपूर्ण आन्दोलन के दौरान किसी भी बिजलीकर्मी को गिरफ्तार किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ शुरू होगा जेल भरो आन्दोलन :

ऊर्जा मंत्री के साथ हुएy समझौते के क्रियान्वयन के प्रति ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबन्धन के नकारात्मक एवं हठवादी रवैये के चलते बिजलीकर्मियों को दिनांक 16 मार्च रात 10 बजे से 72 घण्टे की सांकेतिक हड़ताल पर जाने हेतु बाध्य हुए । नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रीसिटी इम्प्लॉइज एण्ड इंजीनियर्स(एनसीसीओईईई) के आह्वान पर उप्र के बिजलीकर्मियों की हड़ताल के समर्थन में आज देश के सभी प्रान्तों में लाखों बिजलीकर्मी सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

एनसीसीओईईई के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण ढंग से आन्दोलन कर रहे उप्र के बिजलीकर्मियों का किसी भी प्रकार से उत्पीड़न किया गया तो देश के अन्य प्रांतों के 27 लाख बिजलीकर्मी मूकदर्शक नहीं रहेंगें और ऐसे किसी भी दमनकारी कदम का देशभर में सशक्त प्रतिकार किया जायेगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर चल रहे कार्य बहिष्कार के दूसरे दिन बदायूं सहित प्रदेश के सभी जनपदों एवं परियोजनाओं पर विशाल विरोध प्रदर्शन किये गये।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने एक बार पुनः दोहराया है कि ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबन्धन की हठवादिता के चलते बिजलीकर्मियों को हड़ताल पर जाने हेतु बाध्य होना पड़ रहा है। जिससे बदायूं सहित प्रदेश के सभी जिलों में विद्युत सप्लाई व्यापक तरीके से बाधित है बदायूं जिले में 70% उपभोक्ता बिजली के लिए तरस रहे है। इसके लिए केवल विद्युत विभाग का उच्च प्रबंधन की मनमानी रवाया ही जिम्मेदार है।

समझौते के कुछ प्रमुख बिन्दुओं में बनी सहमति के अनुसार ऊर्जा निगमों के चेयरमैन एवं प्रबन्ध निदेशक का चयन समिति के द्वारा किया जाना, पूर्व की तरह मिल रहे तीन पदोन्नति पदों के समयबद्ध वेतनमान के आदेश किया जाना, बिजली कर्मियों के लिए पावर सेक्टर इम्प्लॉईज प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाना, पारेषण के विद्युत उपकेन्द्रों के परिचालन एवं अनुरक्षण की आउटसोर्सिंग को बन्द करना, नये विद्युत उपकेन्द्रों का निर्माण पारेषण निगम से कराया जाना, निविदा/संविदा कर्मियों को अलग-अलग निगमों में मिल रहे मानदेय की विसंगति दूर कर समान मानदेय दिया जाना, भत्तों के पुनरीक्षण एवं वेतन विसंगतियों का निराकरण किया जाना प्रमुख है। इसके अतिरिक्त बिजलीकर्मियों की मांग है कि प्रदेश के सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाले विद्युत उत्पादन निगम को ओबरा एवं अनपरा में 800-800 मेगा वाट की 2-2 इकाईयां प्रदान किया जाना मुख्य मांग है। बिजली घरों पर प्रशासन ने लेखपालों की लगाई ड्यूटी जबकि लेखपाल राजस्व का काम जानते हैं बिजली घरों के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं लेखपालों से पूछा तो उन्होंने कहा हमारे लिए शांति व्यवस्था बनाने के लिए ड्यूटी लगाई गई है
संघर्ष समिति के मुख्य पदाधिकारियों हितेंद्र, हर्षवर्धन, हरीश ,यश भारद्वाज, कुशमेंद्र, विक्रांत सैनी, बी एल मौर्य, प्रमोद कुमार, धर्मात्मा, रणवीर यादव, विकास, सतेंद्र कुमार, डी के अग्रवाल , समरजीत , शिल्पी, महेंद्र प्रसाद ,राम किशोर, शिवांशु, अतुल यादव, ललित सक्सेना, धीरेंद्र , जापान सिंह विवेक शर्मा, मुशबीर अली ने सभा को सम्बोधित किया।

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