20 जून तक की जाए भूमि और तालाबों की नीलामी : सीडीओ

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बदायूं। सरकार का शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर है, इसीलिए प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा प्रणाली बदलने लगी है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने के उद्देश्य से स्कूल चलो अभियान की शुरूआत हुई, जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों के नाम स्कूलों में लिखाए गए, ताकि वह अपने भविष्य में कांधे से कांधा मिलाकर चल सकें। इन स्कूलों में बच्चों को तकनीकी से जोड़ने के लिए डिजिटल शिक्षा पर भी फोकस किया जा रहा है। साथ ही स्कूलों में स्मार्ट क्लास से भी पढ़ाई कराने पर फोकस किया जा रहा है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो और प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी कान्वेंट स्कूलों के बच्चों को टक्कर दे सकें।
सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में मुख्य विकास अधिकारी ऋषिराज ने खण्ड विकास अधिकारियों एवं खण्ड शिक्षा अधिकारियों के साथ शिक्षा व्यवस्था को डिजीटलीकरण करने के उद्देश्य से आयोजित की। सीडीओ ने निर्देश दिए कि 20 जून तक विद्यालयों की खाली पड़ी कृषि योग्य भूमि को नीलाम कराया जाए, साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि भूमि का रेट वहां की स्थानीय भूमि के सामान ही होना चाहिए। इस कार्य में खण्ड विकास अधिकारी एबीएसए का सहयोग करें तथा खण्ड विकास अधिकारी तालाबों की नीलामी कराएं, इन दोनों नीलामियों से स्कूल को डिजीटल किया जाए। जनपद में कम से कम 35 ऐसे विद्यालयों बनाए जाएं, जिनमें स्मार्ट क्लास के पास अच्छा व सुन्दर बगीचा हो, पेड़ों के नीचे बैठने के लिए चबूतरा, बच्चों के खेलने के लिए मैदान हो, जिसे देखकर बिल्कुल कान्वेंट स्कूल की तरह महसूस हो। हमें बच्चों को पढ़ने के लिए एक अच्छा वातावरण देना है, इससे बच्चों को पढ़ने में भी अच्छा लगेगा और वह विद्यालय आना भी ज़रूर चाहेंगे। स्मार्ट क्लास से पहले जहां छात्रों को किताबों के माध्यम से शिक्षा दी जाती थी, वहीं अब स्मार्ट क्लासेज की शुरुआत होने जा रही है जिससे शिक्षक छात्रों को विजुअल के माध्यम से पढ़ाते नजर आएंगे। स्मार्ट क्लास में जहां छात्र-छात्राएं खासे उत्साहित दिखेगे, तो वहीं शिक्षक भी नई तकनीक से शिक्षा देने में रुचि लेंगे। समय के साथ साथ हमें परंपरागत शिक्षण विधियों के अलावा आज की आधुनिकता को देखते हुए नई-नई शिक्षण नीतियां लाने की जरूरत है। वर्तमान समय को ध्यान में रखते हुए हमें शिक्षा में तकनीकी शिक्षा की आवश्यकता है। जिससे कि हमारे समाज में नई शिक्षा क्रांति लागू हो। इस प्रकार की शिक्षा से बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा तथा समय की बचत होगी और बेहतर शिक्षा मिलेगी साथ ही साथ बच्चों के जो बस्तों का बोझ होता है वह भी कम होगा, जिससे कि शिक्षा का दायरा विस्तृत रूप से समझने में और समस्या को हल करने में मदद मिल सके। आज परंपरागत अध्ययन कक्ष और विद्यार्थी और शिक्षक के बीच एक सही ढंग से वार्तालाप हो सके और समय की बचत हो। इसके लिए शिक्षा का डिजीटलीकरण होना आवश्यक है।

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