पंचायती राज्य के सुदृढ़ीकरण में महिलाओं की भूमिका विषय पर विचार गोष्ठी

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बदायूं। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय में आज आई० क्यू०ए०सी० के तत्वावधान में “नारी सुरक्षा,सम्मान एवं स्वावलंबन हेतु चलाए जा रहे “मिशन शक्ति तृतीय चरण विशेष अभियान” के तहत “पंचायती राज्य के सुदृढ़ीकरण में महिलाओं की भूमिका” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ० वंदना शर्मा के संरक्षण एवं निर्देशन में व आई०क्यू०ए०सी० कॉर्डिनेटर असि० प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती के संयोजन एवं संचालन में माँ शारदे को नमन् करते हुए किया गया। छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा ने बताया कि प्राचीन समय से ही भारत में महिलाओं का स्थान महत्वपूर्ण रहा है। आजादी के बाद भी महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। चाहे वो विज्ञान का क्षेत्र हो या कला, साहित्य, सुरक्षा, खेल इत्यादि सभी क्षेत्रों में आगे हैं। सरकारें भी उन्हें आगे बढ़ने के लिए कई कदम उठा रही हैं। जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और समाज में बदलाव ला सकें। पंचायती राज अधिनियम-1992 लागू होने से गांव की महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। वर्तमान समय में महिला आरक्षण को कई राज्यों ने 33% से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक दिया है। जिससे ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भूमिका और भागीदारी बढ़ी है।

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कार्यक्रम का संचालन करते हुए संयोजिका असि० प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती ने कहा किग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायती राज अधिनियम-1992 महिलाओं के लिए एक वरदान के रूप में उभरी है इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में इस कानून लागू होने से महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। भारतीय समाज में महिलाओं को अभी और आगे आने की जरूरत हैं। विभिन्न अधिकार और आरक्षण प्राप्त होने के बावजूद, आज पंचायतों में महिलाओं की जगह उनके पति, पुत्र, पिता या रिश्तेदार उनकी भूमिका निभाते नजर आते हैं। अधिकतर निर्वाचित महिलाओं को निर्वाचक सदस्य होने के विषय में पूर्ण जानकारी भी नहीं है। ग्राम सभा की बैठकों में वे मूकदर्शक बनी रहती है, और उनके रिश्तेदार ही पंचायत के कामों का संचालन करते हैं। डॉ इन्दू शर्मा ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार तो आया है। परन्तु अभी भी वह महिलाऐं इतनी सशक्त नहीं हुई हैं। इसके लिए महिलाओं को भी निडर होकर आगे आना होगा। डॉ निशी अवस्थी ने बताया कि महिलाओं में आत्मनिर्भरता और आत्म-सम्मान का विकास हुआ है। इस अवसर पर डॉ श्रद्धा यादव डॉ शिखा पांडेय डॉ शिल्पी शर्मा सहित समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा। छात्राओं में दिशा,सलिनी, सौम्या, सलोनी, राजकुमारी आदि की सक्रिय सहभागिता रहीं।

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