एनएसएस स्वयंसेविकाओं ने विचार ग़ोष्ठी आयोजित कर महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई
बदायूँ। गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई के तत्वावधान में स्वयंसेविकाओं ने कार्यक्रम अधिकारी असि० प्रो० सरला देवी चक्रवर्ती के निर्देशन में महर्षि वाल्मीकि, व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर विचार ग़ोष्ठी आयोजित कर रखें विचार , मनायी वाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास के साथ।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ०गार्गी बुलबुल के संरक्षण में कार्यक्रम अधिकारी असि०प्रो० सरला देवी चक्रवर्ती द्वारा महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं स्वयंसेविकाओं द्वारा पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम अधिकारी असि० प्रो० सरला देवी ने बताया कि हिन्दुओं के आदि काव्य रामायण के रचयिता और संस्कृत भाषा के परम ज्ञानी महर्षि वाल्मीकि के जन्म दिवस को देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान श्री राम के पावन एवं आदर्श चरित्र को लिपिबद्ध कर मानव सभ्यता को महाग्रंथ ‘रामायण’ का अनुपम उपहार भेंट करने वाले, महान रचनाकार, देववाणी संस्कृत के मर्मज्ञ, आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी एक असाधारण व्यक्तित्व थे। आपके समतामूलक विचार मानव सभ्यता एवं संस्कृति के पथ प्रदर्शक हैं। आपको कई भाषाओं का ज्ञाता और संस्कृत भाषा का पहला कवि माना जाता है। आप ने रामायण में चौबीस हजार छंद और 77 कांड लिखा है। वाल्मीकि जयंती के दिन महर्षि के उपलब्धियों को याद किया जाता है। उनका जीवन और चरित्र आज भी लोगों के लिए प्रेरणादायी है। आगे बताया कि महर्षि वाल्मीकि वैदिक काल के महान ऋषियों में से एक थे। वाल्मीकि पहले एक डाकू थे, लेकिन फिर ऐसी घटना घटित हुई जिसने उनको बदलकर रख दिया। प्राचार्या डॉ०गार्गी बुलबुल ने बताया कि वाल्मीकि जी जो कि रामायण के रचियता थे। इनकी महान रचना से हमें महा ग्रन्थ रामायण का सुख मिला। यह एक ऐसा ग्रन्थ हैं जिसने मर्यादा, सत्य, प्रेम, भातृत्व, मित्रत्व एवम सेवक के धर्म की परिभाषा सिखाई। स्वयंसेविका कु० शीतल, इलमा नाज, दिशा आदि ने कहा कि वाल्मीकि जी के जीवन से बहुत सीखने को मिलता हैं। कु० दिशा सिंह ने कहा कि उनका व्यक्तितव साधारण नहीं था उन्होंने अपने जीवन की एक घटना से प्रेरित होकर अपना जीवन पथ बदल दिया, जिसके फलस्वरूप वे महान पूज्यनीय कवियों में से एक बने। कु० शिवांगी ने बताया कि वाल्मीकि जी का चरित्र उन्हें महान बनाता हैं और हमें उनसे सीखने के प्रति प्रेरित करता हैं। सभी स्वयंसेविकाओं की सक्रिय सहभागिता रही।













































































