बिल्सी। नगर के कछला रोड स्थित श्री माहेश्वरी भवन में श्रीराम-कृष्ण समिति के तत्वावधान में चल रही भगवान रामकथा के अंतिम दिन कथावाचक अयोध्यादास रामायणी महाराज ने आज बुधवार यहां भगवान राम और लंकापति रावण के साथ हुए युध्द का वर्णन करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति बुराई का ज्यादा दिनों तक साथ नहीं दे पाता है। एक न एक दिन सभी लोग बुराई का साथ छोड़ जाते है। इसलिए लंकापति रावण के भाई विभीषण ने भी बुराई का साथ छोड़ते हुए भगवान राम के चरणों में शरण ली थी। स्वामी जी ने जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना पर बल देते हुए कहा कि सत्य बोलना और क्षमा करना, बड़ों की सेवा करना कभी भी खाली नहीं जाता है। इसका फल जीवन में अवश्य ही मानव को मिलता है। इसलिए मानव को इनका पालन में करना चाहिए। उन्होने कहा कि रावण और भगवान राम के मध्य युध्द चल रहा था। जिसमें रावण पर विजय पाना राम को काफी मुश्किल हो रहा था। तब विभीषण ने भगवान राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत कुंड है। उसके रहते उस पर कोई भी विजय प्राप्त नहीं कर सकता है। तब भगवान राम ने रावण के अमृत कुंड का विनाश कर दिया और थोड़ी ही देर में भगवान राम के हाथों रावण का वध हो गया। इसके बाद लंका का राज विभीषण को सौंप दिया गया। साथ ही भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास काटकर वापस अयोध्या लौट आएं। जहां उनकी प्रजा ने बड़े धूमधाम से भगवान राम का राज्यभिषेक किया गया। अंत में राम नाम का महत्व को भी विस्तार से समझाया। इसके बाद रामकथा का समापन हो गया। इस मौके पर नरेंद्र गरल, चंद्रपाल तोष्नीवाल, सत्यपाल वार्ष्णेय, दुर्गेश बाबू वार्ष्णेय, मनोज वार्ष्णेय, लोकेश बाबू वार्ष्णेय, सुधीर माहेश्वरी, नीरज माहेश्वरी, नरेंद्र गरल, सुवीन माहेश्वरी, सुरेश चंद्र गुप्ता, देशराज शाक्य, बनवारी लाल शर्मा, आशीष वशिष्ठ, गोरेलाल शर्मा, दयाचंद्र आदि मौजूद रहे।