“माहेश्वरी साहित्यकार मंच फेसबुक”पेज पर हिन्दी दिवस पर अंताक्षरी का हुआ सफल आयोजन
बदायूं।गत दिवस माहेश्वरी साहित्यकार मंच फेसबुक पेज पर ऋषि पंचमी पर भाई बहन को समर्पित एक लेखनी का कार्यक्रम व हिन्दी दिवस पर आधारित प्रथम बार अंताक्षरी कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसमें संस्मरण ,आलेख, कविता, गद्य- पद्य के द्वारा सभी भाई एवं बहनों ने अपने -अपने मन के विचार व्यक्त किए ।संस्थापक श्याम सुंदर माहेश्वरी ,सतीश लखोटिया जी, कलावती जी करवा, मधु भूतड़ा, स्वाति जैसल मेरिया के द्वारा निर्देशित कार्यक्रम में सभी की बढ़-चढ़कर प्रतिभागिता रही। संस्थापक मंडल के द्वारा कार्यक्रम के शुभारंभ का आगाज करने पर सभी ने अपनी -अपनी प्रस्तुतियां उत्साह पूर्वक अपने-अपने भाइयों के फोटो के साथ दीं, जिससे उनका भ्रातृ प्रेम प्रकट हुआ।
“मिले सुर मेरा तुम्हारा” के तहत देश के माहेश्वरी रचनाकारों के सृजन व भावों को सम्मिलित करके वीडियो रिलीज किया गया, जो हमारी संस्कृति संवर्धन का खूबसूरत परिचायक बना और लोगों द्वारा बेहद पसंद किया गया।
श्याम माहेश्वरी, छिंदवाड़ा ने अपनी हिंदू संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर सभी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। सतीश लखोटिया ने अपने सुंदर विचारों -“सरल सहज भाव लिए बांधती नेह की डोर” जैसे शब्दों से लाभान्वित किया। कलावती कर्वा ने -” अद्भुत अपूर्व निराला है यह प्रेम पर्व निराला है।”स्वाति जैसलमेरिया ने कहा-“वो भाई बहन का रिश्ता ही क्या जिसमे लड़ाई झगड़ा न हो।
“मधु भूतड़ा ने किया एक चिंतन – “रक्षा बंधन का त्यौहार क्या सिर्फ एक दिन का उत्सव” समय बहुत तेज गति से बदल रहा है, रिश्तों को सम्भाल कर रखने की जरूरत आन पड़ी है और साथ ही हिंदी के लिए आंतरिक मनोभावों के साथ लिखा ” हिन्दी मेरे मन में बसती है ,महके फूलों सी खिलती है।”
कविता द्वारा प्रस्तुति देने वालों में किरन अटल ने कहा-” अबकी बार रक्षाबंधन आया ,कलाई तेरी सूनी रह गई।” , राजदीप पेडीवाल ने कहा -“दीदी आज तुझे याद करके बहुत रोया।” प्रभा भैया (नागपुर) ने कहा-“राखी के पावन प्रसंग पर बहना लौट आया हूं।”
पवन पुरुषोत्तम,लाखनलाल माहेश्वरी, ममता लखानी, ममता राठी (उज्जैन)अरुण कोठारी,मंजू हरकुट,अनिल ईश्वर दयाल, भारती माहेश्वरी, विनीता निर्झर, विनोद फाफट, द्वारिकाप्रसाद , कुमकुम काबरा,
उर्मिला तापड़िया, सुनीता बाहेती, चेतना माहेश्वरी,सुमन माहेश्वरी,लता राठी, सुनीता माहेश्वरी, गीतू हरकुट, नेहा चितलांगिया, नीलम पेड़ीवाल, प्रसन्ना राठी, स्वाति मान्धना, सरोज गट्टानी,रेखा गुप्ता, श्वेता धूत,गोवर्धन बिनानी, सुमिता मूँधड़ा, भरत भूषण गांधी, रंजना बिनानी, प्रज्ञा श्री थिरानी, निखिलेश शाह, अनुपमा तोषनीवाल, अतुल अविरल, नीलम सोमानी, पंकज राठी,मीनू भट्टड़, उर्मिला धूत, घनश्याम लाठी, सुनीता लाहोटी, ज्योत्सना माहेश्वरी,शीला तापड़िया, दीपमाला माहेश्वरी भगवती बिहानी, भारती काल्या, मनीषा राठी, अनुभि माहेश्वरी की दोनों विषयों पर उम्दा लेखनी के साथ-साथ संस्मरण आलेख में मधु भूतड़ा, डॉ शुभ्रा माहेश्वरी (बदायूं ), रेखा लखोटिया व सुनीता मल्ल ने अपने बचपन व जीवन के निजी संस्मरण साझा किए।किरन कलंत्री ने आलेख।
हिन्दी दिवस को नया रूप व आकार देकर नवीन जोश लाने का सार्थक प्रयास अंताक्षरी के रूप में किया गया। हिन्दी शब्द से काव्यमय अंदाज । डॉ शुभ्रा माहेश्वरी बदायूं ने कहा- “हिन्दी दिवस पर ऐसा रंग बिखेर जाऊंगी, याद रखो ऐसा ढंग बिखेर जाऊंगी।” कलावती करवा ने शब्दों को खूब सजाया – “सरस सुहावन लग रही, हिंदी है रसदार” शशि लाहोटी,बाल किशन जाजू,पूजा नबीरा,दीपा ,संजय माहेश्वरी, अनीता मंत्री जैसे कलमकारों ने उम्दा विषयों पर अपनी कलम चला कर मंच को सुशोभित किया।













































































