राजकीय महाविद्यालय के हिन्दी सप्ताह में संगोष्ठी का आयोजन
बदायूं।आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय बदायूं में हिंदी विभाग के द्वारा मनाए जा रहे हिंदी सप्ताह के अंतर्गत संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रभाषा हिंदी के उत्थान के लिए छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने विचार-विमर्श किया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कार्यवाहक प्राचार्य डॉ अंशु सत्यार्थी ने किया तथा संचालन हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ प्रेमचंद चौधरी ने किया। संगोष्ठी का उद्घाटन मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के द्वारा हुआ। प्राचार्य डॉ सत्यार्थी ने कहा कि हम सभी का साध्य ज्ञान प्राप्त करना है और उसके लिए साधन के रूप में मातृभाषा से उत्तम कोई और भाषा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि ज्ञान विज्ञान की उत्कृष्टता किसी भाषा की मोहताज नहीं होती, इसलिए हम सभी को विदेशी भाषाओं की उत्कृष्टता का भ्रम त्याग कर अपने राष्ट्र को सशक्त बनाने की दिशा में एकता का आधार राष्ट्रभाषा हिंदी से प्यार करना होगा। डॉ प्रेमचंद चौधरी ने कहा कि हम दुनिया की ओर देख रहे हैं और दुनिया हमारी ओर देख रही है। संपूर्ण विश्व को भारत और भारतीयता से विशेष अपेक्षाएं हैं। उसी भारतीयता का महत्वपूर्ण अंग राष्ट्रभाषा हिंदी है।
इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वयक डॉ संजीव राठौर ने कहा कि आजादी दिलाने तक राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े सभी महापुरुषों की एकता का माध्यम हिंदी ही थी, जिसे आजाद भारत की वोट बैंक की राजनीति में उत्तर भारत व दक्षिण भारत के बीच विभेद पैदा कर हिंदी को कमजोर किया गया।संगोष्ठी में डॉ डाली,डॉअनिल कुमार, कुमारी दीक्षा सक्सेना, कुमारी एकता सक्सेना,वीरेंद्र सिंह,यश कुमार, कु वर्षा,कु नेहा आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर डॉ श्रद्धा गुप्ता, डॉ बबीता यादव,डॉ पवन शर्मा,डॉ सतीश सिंह यादव,डॉ नीरज कुमार, डॉ बरखा, डॉ शशि प्रभा,राजधारी यादव,डॉ सचिन राघव,डॉ संजय कुमार, डॉ ज्योति विश्नोई, डॉ सरिता यादव आदि उपस्थित थे।














































































