बिल्सी। नगर के श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज द्वारा मनाए जा रहे दस दिवसीय पर्युषण पर्व का चौथा दिन यहां उत्तम शौच धर्म के रुप में मनाया गया। यहां सबसे पहले जिनेन्द्र भगवान का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना की गई। मीडिया प्रभारी प्रीत जैन ने उत्तम शौच धर्म के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शौच का अर्थ शुचिभूत होना अर्थात् काल से आत्मा सप्तधातु मय शरीर के संसर्ग से अपवित्र कहलाता है। इस अपवित्र शरीर से भिन्न जो शुद्धात्मा का ध्यान करके उसी में रत रहता है तथा जो मैं सदा शुद्ध बुद्ध हूँ, निर्मल हूँ, स्फटिक के समान हूँ, मेरी आत्मा अनादि काल से शुद्ध है। इस तरह हमेशा अपने अंदर ही ध्यान करता है। वह शुचित्व है। आत्मा का स्वरूप ही शौच धर्म है। नीरेश जैन के सानिध्य में वीरांगना मंडल की ओर से आयोजित किए जा रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत यहां बच्चों की एक मिनट प्रतियोगिता का आयोजित की गई। जहां बच्चों ने अपनी श्रेष्ठ कुशलता का प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। सेमीफाइनल राउंड में चार बच्चे चुने गए। जिसका फाइनल राउंड संभव जैन एवं प्रज्ञा जैन के बीच हुआ। जिसमें संभव जैन अव्वल रहे। इस मौके पर अनिल जैन सोनी, मीडिया प्रभारी प्रशान्त जैन, मृगांग जैन उर्फ टीटू, दीपक जैन, सुनील जैन, पीयूष जैन, बॉबी जैन, संतोष जैन, सतीश चंद जैन, सुनील जैन, डॉ आरती जैन, मोना जैन, ऋतु जैन, इंदु जैन, पूजा जैन, सोनल जैन, प्रीति जैन, सुमन जैन, रीता जैन, रेखा जैन, राखी जैन, दिव्या जैन, सलोनी जैन, प्रतिभा जैन आदि मौजूद रहे।