गिन्दोदेवी महाविद्यालय में साक्षरता दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम हुए
बदायूं। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर महिला शिक्षा एवं समाज विषय पर विचार गोष्ठी एवं निबंध व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। कहा शिक्षा का धन है सबसे न्यारा, कभी न होता इसका बँटवारा।

गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय बदायूं की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वाधान में मिशन शक्ति तृतीय चरण के अंतर्गत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में आज मिशन शक्ति कार्यक्रम प्रभारी,संयोजिका वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती के निर्देशन एवं नेतृत्व में व कार्यक्रम अधिकारी डॉ इति अधिकारी के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर महिला शिक्षा एवं समाज विषय पर विचार गोष्ठी एवं निबंध व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमे स्वयंसेविकाओं ने बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया। गोष्ठी का शुभारंभ प्राचार्या डॉ गार्गी बुलबुल की अध्यक्षता में माँ शारदे को नमन् कर किया गया।कार्यक्रम अधिकारी सरला चक्रवर्ती ने समाज व राष्ट्र उत्थान में महिला शिक्षा की अहम भूमिका है। शिक्षा हमारे लिए उतनी ही जरूरी है जितना भोजन पानी और हवा की। यह जीवन के लिए जरूरी है, पर शिक्षा जहाँ होती है वहाँ विकास, सुख, समृद्धि और उन्नति होती हैं। शिक्षा आपके अधिकारों से आपको अवगत कराती है। आपको आपका शोषण होने से बचाती है।शिक्षा पल-पल आपका साथ निभाती हैं।

तो शिक्षा हमे समाज में मान सम्मान और सबसे बढ़कर हमें इंसान बनाती हैं। अशिक्षा दुःख, उदासी, निराशा, हताशा, असफ़लता, बीमारी आदि का कारण होती हैं। डॉ इति अधिकारी ने बताया कि गरीब होना बुरा नहीं पर अशिक्षित होना बहुत बुरा हैं। प्राचार्या डॉ गार्गी बुलबुल ने बताया कि शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए बरसों से किया जा रहा है, लेकिन उसकी ज्वाला उतनी तीव्रता से धधक नहीं पा रही। जरूरी नहीं है, कि इसके लिए हमें कोई बड़े काम से शुरूआत करनी हो। इसके लिए आइए संकल्प लें इस साक्षरता दिवस पर किसी एक व्यक्ति को साक्षर बनाये देश विकसित तभी होगा जब हर व्यक्ति साक्षर होगा। स्वयंसेविका कु लवली शर्मा ने कहा कि प्रगति से नहीं होगी दूरी जब सबकी साक्षरता होगी पूरी।आप कम से कम सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी तो बांट सकते हैं, जो आपके छोटे से प्रयास से अंधकारमय जीवन में एक नया दीपक जला सकती है। क्योंकि शिक्षा रोजगार या पैसे से ज्यादा खुद के विकास के लिए जरूरी है। कु पूनम यादव,राजकुमारी, रितिका राजपूत, वैष्णवी, उजाला शंखधार आदि स्वयंसेविकाओं ने बताया कि अगर आप घर पर किसी गरीब बच्चे को न पढ़ा पाएं, तो अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर कोई छोटा सा समूह बनाकर, उसके स्कूल जाने की व्यवस्था जरूर कर सकते हैं। कुछ वक्त निकालकर, उन पिछड़े क्षेत्रों व लोगों के बीच शिक्षा के महत्व को साक्षा कर सकते हैं, जहां शिक्षा से जरूरी मजदूरी और ज्ञान से जरूरी भोजन होता है। आप ज्ञान के प्रकाश से वंचित तबके को इस बात एहसास करा सकते हैं, कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें सौम्या सक्सेना प्रथम, शालिनी शंखधार द्वितीय एवं पूनम यादव,लवली शर्मा,स्नेहा यादव एवं उजाला शंखधार संयुक्त रूप से तृतीय रहीं। निबंध एवं स्लोगन के माध्यम से जन जन को दिया संदेश कि-शिक्षा का धन है सबसे न्यारा, कभी न होता इसका बँटवारा। क्योंकि विकसित राष्ट्र की यही कल्पना है, शिक्षित पूरे देश को करना हैं।। अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रमअधिकारी ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।














































































