200 करोड़ से अधिक के अमर ज्योति चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई, दोनों भाई गिरफ्तार
बदायूं। अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम पर निवेशकों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कंपनी के निदेशक शशिकांत मौर्य और उसके भाई सूर्यकांत मौर्य को एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस पूरे आर्थिक घोटाले में निवेशकों से जुटाई गई रकम, एजेंटों की भूमिका और फरार रहने के दौरान आरोपियों के ठिकानों की भी जांच कर सकती है।
बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र स्थित कटरा चांद खां निवासी शशिकांत मौर्य और उसके भाई सूर्यकांत मौर्य ने बदायूं में अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के नाम से वित्तीय कारोबार शुरू किया था। पुलिस के मुताबिक कंपनी के माध्यम से एजेंटों का नेटवर्क तैयार कर लोगों को निवेश पर बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया गया और बड़ी संख्या में लोगों से रकम जमा कराई गई। पूर्व में सामने आई पुलिस कार्रवाई और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक निवेशकों की संख्या हजारों में बताई गई है। एक रिपोर्ट में करीब 15 हजार निवेशकों का भी उल्लेख किया गया है।
बताया गया कि कई वर्षों तक एजेंटों के जरिए लोगों से आरडी, एफडी और अन्य निवेश योजनाओं के नाम पर रकम जमा कराई जाती रही। जब निवेशकों को उनकी जमा रकम वापस मिलने का समय आया तो कंपनी का कामकाज बंद हो गया और संचालक फरार हो गए। इसके बाद निवेशकों और एजेंटों में आक्रोश फैल गया। बदायूं के साथ बरेली समेत अन्य जिलों में भी आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए। पुलिस ने कंपनी से जुड़े कई एजेंटों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय तक नौ एजेंटों की गिरफ्तारी हो चुकी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बदायूं पुलिस ने एसआईटी गठित की थी। दोनों भाइयों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किए गए थे। बाद में बदायूं पुलिस की रिपोर्ट पर पहले 25-25 हजार रुपये और फिर बरेली रेंज के डीआईजी की ओर से इनाम बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया गया। गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ को भी लगाया गया था।
मामले में आरोपियों ने गिरफ्तारी से राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अप्रैल 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शशिकांत और सूर्यकांत की गिरफ्तारी पर जारी स्थगन आदेश निरस्त कर दिया था, जिसके बाद दोनों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया था। इसके बाद भी कुछ समय तक दोनों पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।
इस घोटाले की रकम को लेकर अलग-अलग जांच और रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। बदायूं में पुलिस कार्रवाई के दौरान इसे 200 करोड़ रुपये से अधिक का मामला बताया गया, जबकि बरेली, बदायूं और पीलीभीत समेत कई जिलों के निवेशकों को जोड़कर कुछ रिपोर्टों में रकम 500 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसलिए वास्तविक ठगी की रकम का अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने और दस्तावेजों के मिलान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस ने इस मामले में कंपनी से जुड़े बैंक खातों पर भी कार्रवाई की थी। पूर्व की रिपोर्टों के अनुसार 18 बैंक खातों को फ्रीज कराया गया था, जिनमें करीब 1.16 करोड़ रुपये की धनराशि बताई गई थी। वहीं आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की गई और संपत्ति को ठिकाने लगाने के आरोप सामने आए थे।
सूर्यकांत मौर्य को पूर्व में भाजपा से भी जुड़ा बताया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। मामले में राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए गए थे, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
अब दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल निवेशकों की जमा रकम का है। माना जा रहा है कि पूछताछ में कंपनी के वित्तीय लेनदेन, एजेंटों के नेटवर्क, निवेशकों से जुटाई गई रकम और कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। लंबे समय से अपनी रकम वापस मिलने का इंतजार कर रहे निवेशकों की नजर अब पुलिस की आगे की कार्रवाई और रकम की बरामदगी पर टिकी है।
















































































