ईद मीलादुन्नबी पर दरगाह शाह शराफत मियां से निकला जुलूसे चादरपोशी व जुलूसे मोहम्मदी
बरेली। मुताबिक़ 12 रबीउल अव्वल ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के मुबारक मौके पर उर्स-ए-शराफती के अगले दिन परंपरागत रूप से खानकाह-ए-सकलैनिया शराफतिया से दरगाह हज़रत शाह मोहम्मद बशीर मियां रहमतुल्लाह अलैह, मोहल्ला गुलाबनगर शरीफ के लिए चादरपोशी का जुलूस निकाला गया। सज्जादानशीन हज़रत शाह मोहम्मद ग़ाज़ी मियां हुज़ूर की सरपरस्ती एवं क़यादत में निकले इस जुलूस में शहर और दूर-दराज़ से पहुंचे हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत की।
जुलूस बुधवार सुबह करीब 10 बजे खानकाह-ए-सकलैनिया शराफतिया से रवाना हुआ। विभिन्न मार्गों से होता हुआ जुलूस दरगाह हज़रत शाह मोहम्मद बशीर मियां रहमतुल्लाह अलैह के मजार-ए-पाक पर पहुंचा। यहां सज्जादानशीन हज़रत ग़ाज़ी मियां हुज़ूर ने चादरपोशी एवं गुलपोशी की और मुल्क व शहर में अमन-ओ-आमान, शांति, भाईचारे, इत्तेहाद और आपसी सौहार्द कायम रहने के लिए खुसूसी दुआएं की।
दरगाह शरीफ पर चादरपोशी के बाद फातिहाख्वानी हुई। इस रूहानी मौके पर परंपरा के मुताबिक तमाम जायरीन और अकीदतमंदों को हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तथा सिलसिले के बुजुर्गों से मंसूब पाकीज़ा तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई। तबर्रुकात की ज़ियारत के दौरान अकीदतमंदों ने अदब व एहतराम के साथ दुरूद-ओ-सलाम का नज़राना पेश किया और अपने लिए तथा मुल्क व कौम की खुशहाली के लिए दुआएं मांगी । चादरपोशी की रस्म के बाद मोहल्ला गुलाबनगर स्थित दरगाह हज़रत बशीर मियां रहमतुल्लाह अलैह से परंपरानुसार जुलूस-ए-मोहम्मदी का आगाज़ हुआ। सज्जादानशीन हज़रत ग़ाज़ी मियां हुज़ूर ने घोसियान मस्जिद से बग्गी पर सवार होकर जुलूस की शुरुआत की।
जुलूस गुलाबनगर, बानखाना, कोहाड़ापीर, नैनीताल रोड और कुतुबखाना होते हुए दरगाह शाह शराफत मियां पर पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के रास्ते में जगह-जगह लोगों ने अकीदत व मोहब्बत के साथ जोरदार इस्तकबाल किया। इस दौरान “सरकार की आमद मरहबा, आक़ा की आमद मरहबा” के नारों से पूरा माहौल गूंजता रहा।
जुलूस के मार्ग में जगह-जगह फातिहाख्वानी, लंगर और शर्बत की सबीलों का भी इंतजाम किया गया था। बड़ी संख्या में लोगों ने जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के लिए लंगर व सबील की व्यवस्था की।
जुलूस में अदब व एहतराम के साथ हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की शान में नात शरीफ के नजराने पेश किए जाते रहे, जबकि अकीदतमंद लगातार दुरूद-ओ-सलाम का विर्द करते रहे। पूरे रास्ते रूहानी और नूरानी माहौल बना रहा।
जुलूस में विशेष तौर पर व व्यवस्थाओं में अल्हाज सादकैन मियां, हाफिज गौसी मियां, मौलाना रुम्मान कादरी, मुर्तुजा सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, हमज़ा सकलैनी, हाजी लतीफ सकलैनी, मुंतसिब सकलैनी, हाफिज जाने आलम, मन्ना सकलैनी, आफताब आलम, इंतिजार हुसैन, खुर्रम सकलैनी, राशिद सकलैनी, सैय्यद आमिर, राजा सकलैनी, शावेज सकलैनी, मुशाहिद सकलैनी, फैसल सकलैनी, कामिल सकलैनी, सैय्यद राशिद सकलैनी, मुक़ीत सकलैनी, जमील सकलैनी, आरिफ सकलैनी, फहमी सकलैनी, फरहान सकलैनी, मोहसिन आलम, अब्बास सकलैनी, पिंटू सकलैनी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
ईद मीलादुन्नबी के इस मुबारक मौके पर आयोजित चादरपोशी एवं जुलूस-ए-मोहम्मदी में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मुल्क में अमन, शहर में भाईचारा एवं आपसी सौहार्द कायम रहने की दुआ के साथ जुलूस का समापन हुआ।
ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौक़े पर निकाले गए जुलूसे मोहम्मदी का कुतुबखाना चौराहे पर हर वर्ष की तरह इस बार भी बेहद शानदार और पुरजोश अंदाज़ में इस्तकबाल किया गया। मोहिब्बाने ग़ाज़ी ओ सक़लैन फाउंडेशन तथा दरगाह शाह शराफ़त मियां पर फ़ैज़ाने शाह सक़लैन फाउंडेशन की जानिब से जुलूस में शामिल सभी अंजुमनों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
इस दौरान जुलूस में शामिल अंजुमनों के सदर व पदाधिकारियों को बतौर यादगार तोहफ़े भी पेश किए गए। नात-ओ-मिलाद की सदाओं और दरूद-ओ-सलाम से पूरा माहौल नूरानी और रूहानी बना रहा। जुलूसे मोहम्मदी में शामिल अंजुमनों के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
इस दौरान जायरीन, अकीदतमंदों और जुलूस में शामिल लोगों के लिए लंगर व सबील का भी बड़े पैमाने पर इंतज़ाम किया गया। लोगों ने पूरे अदब व एहतराम के साथ लंगर व सबील से लाभ उठाया। आयोजकों ने कहा कि जुलूसे मोहम्मदी का इस्तकबाल करना मोहब्बत-ए-रसूल और बुजुर्गाने दीन से अकीदत का इज़हार है तथा यह सिलसिला हर साल इसी तरह जारी रहेगा।
















































































