बरेली। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्कूल यूनिफॉर्म और हिजाब से जुड़ी याचिका खारिज किए जाने के बाद बरेली के मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि याचिका में दो अलग-अलग मुद्दे थे स्कूल यूनिफॉर्म (सिविल ड्रेस) और हिजाब। दोनों को एक साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मौलाना ने कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड स्कूल की चारदीवारी के भीतर लागू होता है। हर स्कूल के अपने नियम और उसूल होते हैं, इसलिए छात्रों को उनका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा है और इसका उल्लेख कुरान शरीफ की सूरह नूर में मिलता है, जिसमें महिलाओं को अपने शरीर को शालीनता से कपड़ों से ढकने का निर्देश दिया गया है। उनके अनुसार यही हिजाब है, जिसे मुस्लिम महिलाएं शरीयत के अनुसार पहनती हैं।मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने इस मामले में वकीलों की पैरवी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि वकील कुरान और हदीस की दलीलों से परिचित नहीं थे, तो उन्हें किसी बड़े मुफ्ती या आलिम से मार्गदर्शन लेकर संबंधित धार्मिक संदर्भ अदालत में प्रस्तुत करने चाहिए थे। उनका कहना था कि इससे न्यायालय को भी इस्लामी दृष्टिकोण की जानकारी मिलती। उन्होंने कहा कि कई लोग ऊंचे पदों पर होने के बावजूद इस्लाम और कुरान-हदीस की जानकारी से अनजान होते हैं, इसलिए सही जानकारी देना जरूरी है।