59वें उर्स-ए-शराफ़ती का कुल शरीफ़ के साथ हुआ समापन, देश में अमन-चैन, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद की मांगी दुआ
बरेली। विश्वविख्यात सूफ़ी बुज़ुर्ग हज़रत शाह मौलाना शराफ़त अली मियाँ रहमतुल्लाह अलैह के 59वें उर्स-ए-शराफ़ती का चौथा और आख़िरी दिन मंगलवार, 25 अगस्त 2026, मुताबिक़ 11 रबीउल अव्वल शरीफ़ को अकीदत व एहतराम के साथ सम्पन्न हुआ। उर्स के अंतिम दिन खानकाह शरीफ़ में सुबह से ही देश-विदेश से आए जायरीन की आमद का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मज़ार-ए-पाक पर हाज़िरी दी और गुलपोशी व इत्रपोशी कर अपनी अकीदत पेश की।
उर्स के अंतिम दिन सुबह 11 बजे खानकाह शरीफ़ में कुल शरीफ़ की महफ़िल आयोजित हुई। कुल शरीफ़ की रस्म खानकाह शरीफ़ के सज्जादानशीन हज़रत शाह मोहम्मद ग़ाज़ी मियाँ हुज़ूर ने अदा की। कुल शरीफ़ में बड़ी तादाद में देश-विदेश से आए जायरीन, मुरीदीन, अकीदतमंद और स्थानीय लोग शामिल हुए। कुल के बाद सज्जादानशीन हुज़ूर ने खुसूसी दुआ फरमाई, जिसमें देश व शहर के अमन-चैन, शांति, सलामती, खुशहाली, भाईचारे और आपसी इत्तेहाद के लिए विशेष रूप से दुआ की गई।
इस अवसर पर खानकाह शरीफ़ की ओर से इंसानियत, मोहब्बत, अमन-चैन, आपसी भाईचारे और एक-दूसरे की मदद करने का पैग़ाम दिया गया। सज्जादानशीन हुज़ूर ने कहा कि बुज़ुर्गाने दीन की तालीमात इंसानियत की खिदमत, मोहब्बत, आपसी मेल-जोल और समाज में शांति कायम करने का संदेश देती हैं। हमें इन तालीमात पर अमल करते हुए समाज में प्रेम, भाईचारा और एकता को मजबूत करना चाहिए।खानकाह के आसपास उमड़ा जायरीन का सैलाबकुल शरीफ़ के मौके पर खानकाह शरीफ़ और आसपास के क्षेत्रों में जायरीन की भारी भीड़ रही। कुतुबखाना, घंटाघर, गली मनिहारान, कोहाड़ापीर, नैनीताल रोड, शाहबाद चौक, ब्रह्मपुरा सहित आसपास के इलाकों में दिनभर जायरीन की आवाजाही बनी रही और पूरा क्षेत्र अकीदतमंदों की भीड़ से पैक रहा। दूर-दराज़ से आए जायरीन ने कुल शरीफ़ में शिरकत की और अपनी मुरादों के लिए दुआएं मांगीं।
उर्स के दौरान खानकाह शरीफ़ में लगातार धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहा। जायरीन ने मज़ार-ए-पाक पर हाज़िरी देकर फातिहा पढ़ी और बुज़ुर्गाने दीन के दरबार में अपनी अकीदत पेश की।
दरगाह उर्स इंतज़ामिया कमेटी की ओर से उर्स के दौरान जायरीन की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, साफ-सफाई, बिजली, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग और पर्याप्त पुलिस-प्रशासनिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया गया। कमेटी ने कहा कि अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों ने उर्स के दौरान अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जायरीन की सुविधा और सुरक्षा के लिए सराहनीय सहयोग प्रदान किया। उर्स इंतज़ामिया की ओर से कहा गया कि उर्स जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराने में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम तथा संबंधित विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा।
उर्स के चारों दिनों में कार्यक्रमों की बेहतर कवरेज और समाचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी सम्मानित प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार साथियों का भी विशेष रूप से शुक्रिया अदा किया गया। उर्स इंतज़ामिया कमेटी ने कहा कि मीडिया के सहयोग से उर्स की धार्मिक, सामाजिक और खानकाही गतिविधियों की जानकारी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंची।
कुल शरीफ़ के मौके पर मंच पर विशेष रूप से अल्हाज सादकैन मियाँ, हाफ़िज़ गौसी मियाँ, इंतिख़ाब सकलैनी, मुर्तुज़ा सकलैनी, महफ़ूज़ सकलैनी, फ़ैज़याब सकलैनी, मुनीफ़ सकलैनी, मुन्तसिब सकलैनी, सरमद सकलैनी, सलमान सकलैनी, मौलाना मुफ़्ती रुम्मान क़ादरी, मौलाना रिफ़ाक़त सकलैनी, मुफ़्ती फ़हीम सकलैनी, मौलाना अनवार सकलैनी, हाफ़िज़ जाने आलम, मौलाना नफ़ीस सकलैनी, हाजी लतीफ़ सकलैनी, इंतिज़ार सकलैनी आदि मौजूद रहे।
कुल शरीफ़ के साथ 59वें उर्स-ए-शराफ़ती का विधिवत समापन हुआ। अंत में मुल्क में अमन-चैन, तरक़्क़ी व खुशहाली, शहर में शांति एवं सौहार्द, आपसी भाईचारे और तमाम जायरीन व अकीदतमंदों की सलामती के लिए खुसूसी दुआ की गई। उपस्थित जायरीन ने सामूहिक रूप से दुआ में शामिल होकर बुज़ुर्गाने दीन की तालीमात पर चलने और इंसानियत व मोहब्बत का पैग़ाम आम करने का संकल्प लिया। उर्स की व्यवस्थाओं में दरगाह उर्स इंतज़ामिया कमेटी रही मुस्तैद।
















































































