दातागंज के ब्लूमिंगडेल स्कूल में विशेषज्ञों ने बताए समस्या प्रबंधन और प्रभावी संवाद के गुर
दातागंज। ब्लूमिंग डेल स्कूल दातागंज में सीबीएसई के निर्देशानुसार शिक्षकों के बौद्धिक एवं व्यावसायिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए शनिवार को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय भवन के मीटिंग हॉल में आयोजित कार्यशाला में ब्लूमिंग डेल स्कूल दातागंज के 54 शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ ब्लूमिंग डेल स्कूल बदायूं की छह शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। ‘क्षमता की इमारत’ कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रशिक्षण में तनाव प्रबंधन और प्रभावी अध्यापन को लेकर शिक्षकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व वेन्यू डायरेक्टर एवं प्रधानाचार्य अनुपम प्रकाश वैश्य तथा विभाग प्रमुख कीर्ति शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सीबीएसई से आए प्रशिक्षकों प्रो. डॉ. मौसम एस. सिन्हा एवं विक्रम सिंह का स्वागत किया।
तनाव प्रबंधन विषय पर आयोजित कार्यशाला में दोनों प्रशिक्षकों ने संयुक्त रूप से शिक्षकों को तनावमुक्त वातावरण में कार्य करने की क्षमता विकसित करने के साथ ही समस्याओं के प्रभावी प्रबंधन के तरीके बताए। प्रशिक्षकों ने कहा कि वर्तमान दौर ‘पूछो और जानो’ का दौर है। शिक्षक का दायित्व केवल बच्चों को विषय पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनके मन में उठने वाले सवालों को समझना और उनके साथ संवाद स्थापित करना भी है। अध्यापक की कार्यशैली का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।
प्रशिक्षकों ने कहा कि कक्षा में पढ़ाना शुरू करने से पहले अध्यापकों को कुछ समय विद्यार्थियों के साथ संवाद करना चाहिए। बच्चों के मन की बात समझने और उनसे सहज संबंध स्थापित करने के बाद विषय को चिंतामुक्त एवं प्रभावी तरीके से पढ़ाया जाना चाहिए। पठन-पाठन की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट और संशयरहित होनी चाहिए, ताकि विद्यार्थी विषय को आसानी से समझ सकें। उन्होंने शिक्षकों को तनाव की स्थिति में संयम बनाए रखने तथा समस्याओं का समाधान सकारात्मक सोच के साथ करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की संचालिका अध्यापिका ऋचा सिंह ने प्रशिक्षकों का परिचय कराते हुए उनके शैक्षिक एवं प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले प्रो. डॉ. मौसम एस. सिन्हा नवोदय विद्यालयों सहित 21 सीबीएसई स्कूलों के विजिटिंग डायरेक्टर एवं सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे हैं। वह वर्ष 2010 से सीबीएसई से जुड़े हुए हैं और 32 सामान्य विषयों के अलावा नौ पाठ्य विषयों पर भी मजबूत पकड़ रखते हैं। विद्यालयों के अतिरिक्त रेडियो एवं टीवी चैनलों के विभिन्न कार्यक्रमों के प्रसारण में भी वह प्रस्तोता के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
इसी क्रम में दूसरे प्रशिक्षक विक्रम सिंह एनसीईआरटी के गणित विभाग के प्रसिद्ध व्याख्याता हैं। उन्होंने गणित विषय में एमएससी, एमएड और पीजीडीसीपी की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह बीएसएसआर सेकेंडरी स्कूल, हाथरस में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को केवल व्याख्यान के माध्यम से ही जानकारी नहीं दी गई, बल्कि बीच-बीच में विभिन्न क्रियात्मक गतिविधियां भी कराई गईं। इन गतिविधियों में सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। गतिविधियों के माध्यम से तनाव की परिस्थितियों को समझने, उनका सामना करने, बेहतर संवाद स्थापित करने तथा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने प्रशिक्षकों से विभिन्न विषयों को लेकर सवाल भी किए और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि शिक्षक स्वयं तनावमुक्त रहकर ही विद्यार्थियों को सकारात्मक और सीखने योग्य वातावरण प्रदान कर सकते हैं। विद्यालय में बेहतर शैक्षिक माहौल तैयार करने में शिक्षक की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की अध्यक्षा पम्मी मेहंदीरत्ता, निदेशक ज्योति मेहंदीरत्ता, मुख्य व्यवस्थापक ईशान मेहंदीरत्ता एवं स्वेता मेहंदीरत्ता ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा सीबीएसई प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया। विद्यालय प्रबंधन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।















































































