मुफ्ती-ए-आज़म का अमल उनके इल्म का आईनादार है: मौलाना अदनान रज़ाउर्स-ए-रज़वी के दूसरे दिन आरएसी की कॉन्फ्रेंस, दरगाह पर 108 टोकरी फूल पेश
बरेली। उर्स-ए-रज़वी और उर्स-ए-अमीन-ए-शरीअत के दूसरे दिन ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) की ओर से मरकज़ी मस्जिद बीबी जी में मुफ्ती-ए-आज़म हिंद कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नबीरा-ए-आला हज़रत एवं आरएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कहा कि “मुफ्ती-ए-आज़म का अमल उनके इल्म का आईनादार था। यदि दुनिया और आख़िरत में कामयाबी चाहते हैं तो उनकी तालीमात और शरीअत पर अमल करना होगा।”
इससे पहले मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी दरगाह आला हज़रत पर हाज़िरी देने पहुंचे, जहां आरएसी की ओर से 108 टोकरी फूल पेश किए गए। उर्स के दूसरे दिन आरएसी मुख्यालय “बैतुर्रज़ा” पर सुबह से ही अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। शहर के विभिन्न हिस्सों और आसपास के क्षेत्रों में लंगर-ए-आम जारी रहा, जबकि बिहारीपुर में मेडिकल कैंप के माध्यम से ज़रूरतमंदों को सेवाएं दी गईं।
दिनभर खजुरिया, रिठौरा, बिथरी चैनपुर, सेंथल, फतेहगंज पश्चिमी, हाफिज़गंज, जोगी नवादा समेत कई क्षेत्रों से चादरों के जुलूस आरएसी मुख्यालय पहुंचे। ट्रैफिक के कारण जहां जुलूस रुके, वहां आरएसी पदाधिकारियों ने पुलिस-प्रशासन के सहयोग से उन्हें आगे बढ़वाया।
इशा की नमाज़ के बाद आयोजित कॉन्फ्रेंस में नात, मनकबत और उलमा की तकरीरें हुईं। मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कहा कि मुफ्ती-ए-आज़म हिंद लोगों को बुराइयों से रोकने, नेकी की राह दिखाने और गैर-शरई कार्यों का निडर होकर विरोध करने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने सभी से उनकी तालीमात पर अमल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन विशेष दुआ और सलाम के साथ हुआ।
आरएसी ने बताया कि उर्स के तीसरे और अंतिम दिन सुबह 10 बजे से “बैतुर्रज़ा” में कुल शरीफ का जलसा होगा तथा दोपहर 2:38 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने सभी पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों को जायरीन की सकुशल वापसी तक सक्रिय रहने के निर्देश दिए।















































































