बरेली। आस्ताना-ए-आलिया मौहम्मदिया (दरगाह वली मियां) में शहादत-ए-उज़मा सय्यदुश्शोहदा हज़रत इमाम हुसैन रज़ीअल्लाहु तआला अन्हु की फ़ातिहा आयोजित की गई। मोहर्रम के अवसर पर दरगाह में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार दाल-रोटी का लंगर 6 मोहर्रम से शुरू होकर 10 मोहर्रम तक लगातार चल रहा है। यह लंगर प्रतिदिन नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद शुरू होकर दिनभर जारी रहता है।कार्यक्रम का शुभारंभ कारी गुलाम यासीन ने पवित्र कुरआन की तिलावत से किया। इसके बाद मौलाना शमीम, सय्यद मुस्तजाब अली और हैदराबाद से आए नवीद सहित अन्य अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन की शान में मनक़बत पेश की। हाफ़िज़ अफ़ज़ाल मोहम्मदी ने अपने बयान में कहा कि इमाम हुसैन से मोहब्बत करना, उनके फ़ज़ाइल बयान करना, कर्बला का ज़िक्र करना और अहले बैत से प्रेम रखना हर सुन्नी मुसलमान के ईमान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि 10 मुहर्रम, 61 हिजरी को इमाम हुसैन ने सच, इंसाफ़ और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ कर्बला में सर्वोच्च बलिदान दिया। शिजरा शरीफ़ के पाठ के बाद दरगाह के सज्जादानशीन अल्हाज अनवर मियां ने दुआ-ए-खैर कराई। कार्यक्रम में सय्यद नाज़िर अली (चांद), आरिफ़ उल्लाह, शराफ़त, जब्बार, रियासत, समीर, मोहसिन, सलमान शम्सी, मोहम्मद कैफ़, इशरत, इफ़्तिखार हुसैन, अख़लाक़ अहमद, गाज़ी, आरिफ़, मुदस्सर, फ़िरासत, फ़ैज़ शम्सी और रूमान सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।