बरेली। सुभाषनगर स्थित पुरवा बब्बन खाँ में मोहर्रम के मुकद्दस महीने के मद्देनजर मजहबी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। यहाँ स्थित चुम्मन बी के 167 साल पुराने ऐतिहासिक व पुश्तैनी इमामबाड़े में अकीदतमंदों ने बड़ी तादाद में पहुंचकर हाजिरी दी और मन्नत के अलम चढ़ाए। इस दौरान अकीदतमंदों ने शहीदे कर्बला हजरत इमाम हुसैन और उनके जानसारों की शहादत को याद कर नम आंखों से खिराजे अकीदत पेश किया।मन्नतें पूरी होने पर चढ़ाए अलम, बंटा शर्बत का लंगर इमामबाड़े के मुतावल्ली आसिफ खान ने बताया कि हर साल मोहर्रम की 5 तारीख को इमामबाड़े को विशेष रूप से सजाया जाता है। इस बार भी मोहर्रम की 5 तारीख पर इमामबाड़े में ‘ज़िक्रे हुसैन’ की महफिल सजाई गई। सलमा खान ने बताया कि इस ऐतिहासिक इमामबाड़े से लोगों की गहरी अकीदतमंदी जुड़ी है। यहाँ बड़ी संख्या में अकीदतमंद मन्नतें और मुरादें मांगने आते हैं। मोहर्रम के दौरान यहाँ हर रोज शर्बत व अन्य तबर्रुक का लंगर तकसीम (वितरित) किया जाता है। बाद नमाजे इशा (रात की नमाज के बाद) अकीदतमंदो इमामबाड़े में इमाम हुसैन की याद में ज़िक्रे हुसैन की महफिल सजाई। महफिल के दौरान बारगाहे इलाही में विशेष दुआएं मांगी गईं। अकीदतमंदों ने खासतौर पर मुल्क व आवाम की सलामती, देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए दुआ की। इसके साथ ही बीमारों को शिफा (स्वास्थ्य लाभ) मिलने और बेरोजगारों को रोजगार की बंदोबस्त के लिए भी खुसूसी तौर पर हाथ उठाए गए। इस अकीदत के मौके पर मुख्य रूप से फरजाना रहुफ, मेहनाज, वामिक खान, कामिल खान, आमिर खान, साहिर खान, गजल, सैफ उल्लाह खां, आतिफ, महेकशा, समरीन, हिना, निशी, आशु, अरसालान, फेजरिन, नसीन उल्लाह खां (एडवोकेट), नौशाद अली, रुबीना, नसीम अहमद, सलीम अहमद और साहिल खान सहित भारी संख्या में स्थानीय और दूर-दराज से आए अकीदतमंद शामिल रहे।